‘सुनें सुनाएं’ के 29 वें सोपान में पढ़ी गई प्रभावी रचनाएं


रतलाम। यह सृजन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है । यहां जाकर प्रत्येक व्यक्ति को एक नई ताज़गी और ऊर्जा मिलती है । यह ऊर्जा कुछ नया पढ़ने, सुनने , लिखने और गढ़ने की प्रेरणा देती है।
उक्त विचार शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु सक्रिय ‘सुनें सुनाएं’ के 29 वें सोपान में उभर कर सामने आए। जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल रतलाम पर आयोजित इस सोपान में दस रचनाप्रेमियों द्वारा अपनी प्रिय रचनाओं का पाठ किया गया। आई.एल. पुरोहित ने इक़बाल अशर की रचना ‘ बे-फै़ज़ एक चराग बताया गया मुझे ‘ का पाठ किया वहीं ऋषिकेश शर्मा ने डॉ. सुनील जोगी की कविता- हम हिन्दू सत्य सनातन हैं ‘ का पाठ, दुष्यंत कुमार व्यास ने वीरेन्द्र मिश्र की रचना ‘ गीतमेघ : आत्मकथ्य ‘ का पाठ ‘डॉ.रवीन्द्र उपाध्याय ने जगदीश सोलंकी की रचना ” यूं तो साथ देने को हजारों हाथ और हैं ” का पाठ, कीर्ति कुमार शर्मा ने यूसुफ़ जावेदी की रचना ‘ नौजवां ओ नौजवां ‘ का पाठ, आयुष्मान देसाई ने डॉ. ओम राज की रचना ‘सोन नदी बहती रही’ का पाठ , डॉ. गायत्री तिवारी ने रामनरेश त्रिपाठी की रचना ‘ अन्वेषण ‘ का पाठ, संजय परसाई ‘सरल’ ने कबीर की रचना ‘ देखो रे जग बौराना ‘ का पाठ, नरेंद्र त्रिवेदी ने गुलज़ार की रचना ‘ क्या है ज़िन्दगी ‘ का पाठ, वयोवृद्ध श्रीराम दिवे ने वी.के.घाटे की रचना ‘ वीर सावरकर’ का पाठ किया गया।
अगला सोपान महिलाओं पर केंद्रित
‘सुनें सुनाएं’ का 30 वां सोपान महिलाओं पर केंद्रित रहेगा। मार्च माह में होने वाले इस सोपान में दस महिला रचनाकारों द्वारा अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया जाएगा।
इनकी उपस्थिति रही
आयोजन को अपनी उपस्थिति से सार्थक बनाने वालों में प्रो. रतन चौहान, ओमप्रकाश मिश्र,गिरीश सारस्वत, इन्दु सिन्हा, सरिता दशोत्तर, अनामिका सारस्वत, सुभाष यादव, निवेदिता देसाई, माधव शर्मा , जितेंद्र सिंह पथिक, विनोद झालानी, जी.के.शर्मा , मीनाक्षी मलिक, शर्मिला उपाध्याय, प्रतीक यादव, ललित चौरडिया, श्याम सुंदर भाटी, राधेश्याम शर्मा, रणजीत सिंह राठौर, नरेंद्र सिंह पंवार, मुकेश व्यास, योगिता राजपुरोहित, मणिलाल पोरवाल, किरण जैन, अभय जैन, रजनी व्यास, विष्णु बैरागी, महावीर वर्मा, आशीष दशोत्तर सहित सुधिजन शामिल रहे।