बीकानेर से राजेंद्र कोठारी द्वारा

रतलाम । सोना नहीं चांदी नहीं हीरे जवाहरात नहीं बल्कि आज 8 फरवरी को बीकानेर में ऐसे अनमोल खजाने का तीन दिवसीय प्रदर्शन होने जा रहा जिसमें जैन धर्म के हजारों साल साल के प्राचीन धर्म ग्रंथो की कोई 10,000 हस्त लिखित पांडुलिपियों का प्रदर्शन होगा।
प्राचीन हजारों साल के धर्म ग्रंथो के हस्त लिखित पांडुलिपियों को 1000 साल से बड़ा उपाश्रय बीकानेर में संरक्षित सुरक्षित करने के बेमिसाल कार्य को जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ के श्री पूज्यजियो, यतियोओ द्वारा क्रियान्वित किया गया है ।
जैन धर्म के प्राचीन धरोहर पांडुलिपियो का प्रदर्शन आगामी 8 ,9 एवं 10 फरवरी को बीकानेर के बड़े उपाश्रय में होने जा रहा है जा रहा है। जर्जर प्राचीन पांडुलिपियों को बचाना एक चुनौती पूर्ण कार्य था ।श्री पूज्य जिन चंद सुरीजी बीकानेर के मार्गदर्शन में उचित रखरखाव के साथ आधुनिक तकनीकी का उपयोग कर हजारों साल की पांडुलिपियों को सुरक्षित करने का उल्लेखनीय कार्य हो सका है। इसके साथ-साथ पांडुलिपियों का डिजिटल आकर भी प्रदान किया गया इस कारण मूल ग्रंथ को अब सुरक्षित भी रखा जा सकेगा इस कारण नई पीढ़ी प्राचीन धरोहर से मुखातिब हो सकेगी वही शोध करने वालों के लिए भी प्राचीन धरोहर उपयोगी साबित होगी।
जैन समाज की प्राचीन धरोहर को जन जन तक तक पहुंचाने के वृहत कार्य को संपन्न कराने में श्री पूज्य जी के योगदान को जैन श्वेतांबर खरतरगचछ मालवा श्री संघ उन्हें नमन करता है। संघ के अध्यक्ष ठाकुर बसंत सिंह श्रीमाल महामंत्री राजेंद्र कोठारी ने इस उपकारी कार्य के लिए ,श्री पूज्य जिन चंद्रजी सुरी का सदैव कृतज्ञ रहेगा। 52 वे पाटो उत्सव के पुनीत अवसर पर देश के विभिन्न स्थान से काफी बड़ी संख्या में व्यक्ति इस समारोह में शामिल होने बीकानेर आए हैं। इंदौर ,उज्जैन रतलाम, नलखेड़ा ,मालवांचल से शामिल व्यक्तियों में कार्यक्रम के प्रति उत्साह देखने को मिला । तीन दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिदिन ध्यान साधना ज्ञान भंडार की धरोहर डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शन एवं भजन संध्या का आयोजन भी होगा।