नारायण किसी के प्रभाव से नहीं आते, नारायण तो बस प्रेम भाव में आते है : महर्षि उत्तम स्वामी जी

रतलाम । सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के आज विश्राम दिवस के अवसर पूज्य गुरुदेव ध्यान योगी महर्षि उत्तम स्वामी जी ने कहा कि परमात्मा के परमार्थ की समाप्ति नहीं होती सिर्फ कथा की समाप्ति होती है । विश्रांति दिवस को आज श्री कृष्ण चरित्र का संपूर्ण वर्णन शिशुपाल जरासंध, जामवंत और कृष्ण युद्ध, जामवंत एवं कृष्ण संवाद, भगवान दत्तात्रेय की कथा, सुदामा चरित्र का रसपान उपस्थित धर्मालुजनों को कराया ।
महर्षि उत्तम स्वामी जी ने कहा कि नारायण किसी के प्रभाव से नहीं आते, नारायण तो बस प्रेम भाव में आते है । परमात्मा की भक्ति ही मोक्ष प्राप्ति का उपाय है । प्रशंसा एवं प्रहार को सहन करने की क्षमता आपके पास होना चाहिए । कलयुग में भगवान का स्मरण ही सुरक्षा का उपाय है। सात दिवसीय कथा के समापन पर स्वामी जी ने सभी को आशीर्वाद देते हुए सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि इस तपती गर्मी में आप लोगों ने नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक श्रीमद् भागवत कथा का रसपान किया है वह प्रशंसनीय है ।  आप लोग एक नियम लें कि प्रतिदिन कुछ समय के लिए राम नाम का जाप करें साथ ही बच्चों को धार्मिक संस्कार प्रदान करें ।
कथा के प्रारम्भ में पोथी पूजन एवं गुरूजन मुख्य यजमान श्रीमती हीरादेवी ओमप्रकाश सोनी परिवार द्वारा किया गया। साथ ही विभिन्न संस्थाओं एवं उपस्थित धर्मालुजनों द्वारा भी पोथी पूजन एवं गुरु पूजन किया गया ।  कथा समाप्ति पर श्री बद्रीनारायण सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र शर्मा, मनोहर पोरवाल, अनिल झालानी, नवनीत सोनी, सत्यनारायण पालीवाल, नारायण राठौड़, मनोज शर्मा आदि द्वारा पूज्य गुरूदेव का सम्मान कर अभिनंदन पत्र भेंट किया एवं आशीर्वाद लिया । साथ ही मुख्य यजमान श्रीमती हीरादेवी ओमप्रकाश सोनी परिवार का श्री बद्री नारायण सेवा ट्रस्ट द्वारा सम्मान कर अभिनंदन पत्र भेंट किया ।  कार्यक्रम के अंत में गुरुदेव उत्तम स्वामी जी द्वारा बांसुरी वादन द्वारा सुमधुर भजन की प्रस्तुत किया एवं आरती कर महाप्रसादी वितरण की गई।
इस अवसर पर गुरु भक्त मंडल सहित बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कैलाश व्यास ने किया एवं आभार डॉ. राजेन्द्र शर्मा द्वारा व्यक्त किया गया ।

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