“लैगिंक उत्पीड़न : समस्याएं एवं समाधान”

लेखिका – विनीता ओझा

नारी प्रेम और सौजन्य की देवी है। इनकी प्रकृति को ईश्वर की कृति कहा जाता है। किसी राष्ट्र की उन्नति स्त्रियों की उन्नति से ही संभव है ।एक समृद्ध राष्ट्र का उदय नारी के सम्मान से ही संभव है। समय परिस्थितियों के बदलाव एवं बढ़ती भौतिक आवश्यकताओं ने महिलाओं को कामकाजी बनाया, घर पर भी एवं कार्य स्थल पर भी। नारी शिक्षा के व्यापक प्रसार एवं सुधार से शिक्षित हुई। अच्छे जीवन स्तर एवं बढ़ते शिक्षा, स्वास्थ्य मूल्य ने महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित किया, लेकिन पुरुष प्रधान समाज में लिंग भेद एवं महिलाओं के शोषण ने उन्हें विचलित भी किया। आज लैंगिक पहचान के आधार पर किए जाने वाले व्यवहार जैसे अपमान, भेदभावपूर्ण व्यवहार की घटनाएं समाचार पत्रों की सुर्खियां बनती जा रही है। पुरुषों के अहंकार, पितृसत्तात्मक सोच एवं स्त्रियों की बढ़ती आत्मनिर्भरता और सामाजिक छवि ने पुरुष में एक तरह का मनोवैज्ञानिक डर उत्पन्न किया है। जबकि नारी शक्ति एवं पुरुष सामर्थ्य का प्रतीक है तथा दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं ।पुरुष वर्ग की असहजता तथा गलत मानसिकता ने लैंगिक उत्पीड़न को बढ़ावा दिया है ।
लैंगिक उत्पीड़न किसी व्यक्ति की मर्जी के बिना किया गया वह दुर्व्यवहार है जो उसे अपमानित ,भयभीत या असहजता की स्थिति निर्मित करे। अनुचित शारीरिक संपर्क, अश्लील टिप्पणियां, भावनात्मक हिंसा, साइबर उत्पीड़न, छेड़छाड़ ,लिंग आधारित भेदभाव, अवांछित व्यवहार, किसी सभ्य समाज में कभी स्वीकार नहीं हो सकता, जिसका उद्देश्य महिला को नीचा दिखाना या अपमानित करना है। कार्य स्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून भी बने हुए हैं। जिसमें भारतीय दंड संहिता आईपीसी की धारा 354 ए के तहत 3 साल की सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है। वही अधिनियम 2013 के अंतर्गत हर संगठन में आंतरिक शिकायत समिति का गठन करना अनिवार्य है। आप अपनी शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग की वेबसाइट www.ncw.gov.in, महिला हेल्पलाइन 181, स्थानीय पुलिस अथवा अपने कार्यालय के प्रमुख को भी कर सकते हैं। जो धारा 4,4-ए ,4- बी और 4- सी के अंतर्गत गैर जमानती होगी। सबूत के तौर पर टेक्स्ट मैसेज ,ईमेल चैट, मैसेज या अन्य गवाह महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हाल ही में मल्टीनेशनल कंपनी टीसीएस में लैंगिक उत्पीड़न का दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया है।
सहनशील होना अच्छी बात है पर अन्याय का विरोध करना उससे भी कहीं ज्यादा अच्छा है। किसी भी अन्याय को सहन करने के बजाय प्रथम स्तर पर उसका प्रतिरोध करने का साहस रखें ।उत्पीड़न महिला पुरुष दोनों के साथ हो सकता है पर अपने स्वार्थ के लिए गलत शिकायत करने से बचे, यह भी कानूनन जुर्म होगा ।

लेखिका – विनीता ओझा
जवाहर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में उच्च माध्यमिक शिक्षिका
एवं मध्य प्रदेश शासन की रतलाम जिले की लेगिंग उत्पीड़न समिति की सदस्या है)

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