आचार्य हितेशचंद्र सूरीश्वर के सान्निध्य में कार्यक्रम


इंदौर (शिरीष सकलेचा) । श्रमण शिरोमणि आचार्य श्री हितेशचंद्र सूरीश्वर जी म.सा. के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में राष्ट्रसंत, उत्तर भारतीय प्रवर्तक परम पूज्य दादा गुरुदेव भंडारी श्री पदमचंद्र म.सा. के दिव्य जीवन और योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया गया। मात्र 17 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण कर उन्होंने तप, त्याग, ज्ञान, ध्यान और सेवा के माध्यम से जन-जन के हृदय में श्रद्धा का केंद्र स्थापित किया। श्रमण संघ के प्रथम आचार्य श्री आत्माराम म.सा. के प्रिय शिष्य रहे भंडारी जी महाराज को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए “भंडारी” की उपाधि प्रदान की गई, जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी।
108 मुमुक्षुओं को दीक्षा, जिनशासन की प्रभावना
उनके आशीर्वाद से असंख्य श्रद्धालुओं के जीवन में सुख-शांति का संचार हुआ तथा उनकी प्रेरणा से 108 मुमुक्षु आत्माओं ने जैन दीक्षा ग्रहण कर जिनशासन की प्रभावना की। इनमें आचार्य सम्राट तपसूर्य डॉ. श्री शिव मुनि म.सा. का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। गुणी संतों का स्मरण पुण्य जागृत करता है। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य विश्वरत्न सागर जी महाराज ने कहा कि गुणी संतों के गुणों का स्मरण करना पुण्य जागृत करने वाला होता है और जीवन को दिशा प्रदान करता है।
पंकज मुनि व वरुण मुनि को अलंकरण
आचार्य श्री हितेशचंद्र सूरीश्वर जी म.सा. ने भंडारी पदमचंद्र जी महाराज के व्यक्तित्व का वर्णन करते हुए उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज को “दक्षिण भारत धर्म प्रभावक” तथा श्री वरुण मुनि जी महाराज को “शासन सूर्य” की पदवी से अलंकृत किया।
शिक्षा, चिकित्सा व समाजसेवा में योगदान
उन्होंने बताया कि गुरुदेव की प्रेरणा से प्रवर्तक श्री अमर मुनि जी म.सा. ने जैनागम प्रकाशन का ऐतिहासिक कार्य किया तथा उनके मार्गदर्शन में देशभर में शिक्षा, चिकित्सा और समाजसेवा से जुड़ी अनेक संस्थाओं की स्थापना हुई, जो आज भी मानव सेवा में समर्पित हैं।
कार्यक्रम में भक्ति व सामाजिक सेवा का समावेश
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। संघ के महामंत्री श्री रमेश भंडारी ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि महासती श्री रश्मि जी एवं महासती श्री विजया जी सुमन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अभिग्रहधारी श्री राजेश मुनि जी महाराज ने गुरु गुणगान प्रस्तुत किया तथा आदर्श ज्योति बहु मंडल द्वारा स्वागत गीत एवं श्री रोहन जैन द्वारा गुरु भक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री रुपेश मुनि जी महाराज एवं प्रकाश भटेवरा ने किया। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा अंत में मानव सेवा के उद्देश्य से अस्पताल को एक दंत चिकित्सा मशीन भेंट की गई।