मंदिर की सभी वेदियो पर महा मस्तकाभिषेक विधान हुआ

भिंड (मप्र) । नगर के हृदय स्वरूप चैत्यालय मंदिर में भिंड के भगवान परम पूज्य राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज जी के सानिध्य में त्रिदिवसीय कार्यक्रम बड़े ही महोत्सव पूर्व क्षणों के साथ अंतिम चरण में पहुंच रहा है इस कार्यक्रम के दौरान चैत्यालय मंदिर के मूलनायक भगवान आदिनाथ स्वामी की वेदिका में स्वर्ण नक्शा दी युक्त चांदी का परिकर लगाया गया मंदिर के शिखर पर कलशारोहन एवं ध्वजा चढ़ाई गई । इसी बीच मंदिर की सभी वेदियो पर महा मस्तकाभिषेक विधान हुआ प्रतिदिन भगवान गुरूदेव की बड़े ही धूमधाम से संगीतमय पूजन आरती हुई । इन सभी कार्यक्रम में भिंड की समस्त दिगंबर जैन समाज ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा दिल खोलकर दान भी दिया इस अवसर पर पूज्य गुरुवर 108 श्री विरागसागर जी मुनिमहाराज ने उपस्त धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा आज हम सभी जिसे भारत देश के नाम से जानते हैं जिसमें हम सभी रहते हैं । भारत देश का पुराना नाम अजनाभ वर्ष था जो कि जैनों के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के पिता नाभि राय जिनका अपर नाम अजान बाहु था उन्हीं के नाम से पड़ा था। इस धरा धरती पर प्रथम राजा भगवान ऋषभदेव थे प्रथम विवाह भी ऋषभदेव का ही हुआ था तभी से महोत्सव पूर्ण विवाह होना प्रारंभ हुए आज जगत में जो संपूर्ण विद्या या विधाएं प्रचलित हैं इनके विधाता अर्थात सिखाने वाले उपदेशक भगवान आदिनाथ ऋषभदेव थे। उनका सूत्र था ऋषि बनो या कृषि बनो। आगम शास्त्रों में विश्वकर्मा नाम से भगवान ऋषभदेव की स्तुति की गई है। जगत में आचरित श्रावक धर्म बमुनि धर्म के उपदेशक भी आदिनाथ भगवान थे ऐसे प्रभु आदिनाथ भगवान हमारे चैत्यालय मंदिर के मूलनायक हैं संपूर्ण भिंड में आज जो सुख समृद्धि है वह आदिनाथ भगवान की ही महती कृपा है । ना केवल जैन समाज अपितु संपूर्ण भिंड वासियों की भगवान आदिनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा भक्ति है भक्तों के दुख दर्द को दूर कर सुख शांति देने वाले आदिनाथ भगवान ही हैं अत: हम सभी तन मन धन से भगवान की भक्ति करें।
पूज्य गुरुदेव की आज्ञानुसार वेदिका पर भगवान विराजमान शिखर पर कलशरोहन एवं कार्यक्रम का भव्य जुलूस 18-01-2020 को निकाला जाएगा। कार्यक्रम का सार स्वरूप कार्य भगवान आदिनाथ प्रतिमा को पुन: वेदिका पर विराजमान करने का सौभाग्य श्रीमान संजय जी ( टीपू ), दुबेश जैन परिवार ने प्राप्त किया।संकलन कोडरमा से राज अजमेरा, नवीन जैन ने दी।