आचार्य श्री सुशील जन्म शताब्दी महोत्सव 2025-26 प्रारम्भ

28 वर्ष बाद गुरूभक्तों में एकता का सूत्रपात हुआ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे

रतलाम । परम पूज्य आचार्य सुशील मुनिजी म.सा. के 100 वां जन्मदिवस जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। अहिंसा भवन शंकर रोड़ नई दिल्ली सहित देश के अलग-अलग क्षैत्रों में 15 जून 2025 से 15 जून 2026 तक गुरूदेव का जन्मदिवस शताब्दी वर्ष के रूप में मनाते हुए पूरे वर्ष विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन किए जाएंगे । इसी के साथ करीब 28 वर्ष बाद समाप्त हुए विवाद और दोनो पक्षों के हुए एमओयू के तहत आपसी समन्वय से दोनों पक्षों द्वारा सामूहिक रूप से आयोजन प्रारम्भ कर दिया है यह आयोजन पूरे वर्ष संचालित होगें ।

28 वर्ष बाद गुरूभक्तों में एकता का सूत्रपात हुआ एमओयू पर हुए हस्ताक्षर

उल्लेखनीय है कि जैन समाज के इतिहास में 26 जुलाई 2022 को एक ऐतिहासिक उस समय आया जब विश्व पूज्य जैन क्रांतिकारी आचार्य अर्हत योगी श्री सुशील मुनिश्री जी म.सा. के देवलोक के पश्चात उनकी संस्था के दो गुटों में जिसमें एक अहिंसा भवन शंकर रोड़ पर लाला मुल्खराज जैन श्री गौतम ओसवाल आदि अन्य गुरू भक्तों एवं डिफेंस कॉलोनी नई दिल्ली अहिंसा विहार में श्री महेन्द्रसिंह डागा गुट में विवाद की स्थिति के बाद दो जगहों से संस्था का संचालनचल रहा था और इस बारे में न्यायालय, उच्च न्यायालय आदि न्यायालयों में विवाद के प्रकरण पंजीबद्ध थे और कई बार जैन एकता के प्रायस हुए। लेकिन किसी ना किसी कारणवश सफला नहीं मिल पाई । दिं. 26 जुलाई 2022 मंगलवार को वह ऐतिहासिक क्षण पूज्य गुरूदेव गुरूदेव के आशीर्वाद स्वरूप एकता का स्वरूप स्थापित हुआ और बातचीत होकर दोनों पक्षों की बैठक अहिंसा भवन शंकर रोड़ आचार्य सुशील आश्रम में सम्पन्न हुई।


जिसमें लाला मुल्खराज जैन पक्ष एवं लाला महेन्द्रसिंह डागा पक्ष एवं उनके सहयोगियों की उपस्तिथि में गुरूदेव की आज्ञानुवर्ती शिष्या साध्वी दीप्तिजी म.सा., साध्वी लक्षिताजी म.सा. के सानिध्य में मंगलवार को सुबह 10.30 शंकर रोड़ नई दिल्ली पर पूज्य गुरूदेव के कक्ष में एक बैठक आयोजित हुई जिसमें दोनों प्रमुख समाजसेवकों की उपस्थिति में शांतिप्रसाद जैन, कमल ओसवाल, सुरेश जैन, एस.पी. जैन (अरिहंत नगर), पीसी जैन (अरिहंत नगर), विजय जैन, लेलिन जैन, पी.सी. जैन (रोहिणी वाले), अतुल जैन ग्रीन पार्क, थरकेन्द्र जैन, राकेश जैन आदि की उपस्थिति में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद एमओयू के कागजात पर लिखा पड़ी कर दोनों पक्षों के प्रमुखों को हस्ताक्षर करके सम्पूर्ण विवाद का पूर्ण विराम लगा दिया गया और एकता का शंखनाद करते हुए पूज्य गुरूदेव आचार्य सुशील मुनिजी म.सा. के जयकारों के साथ सभी ने मिलकर एमओयू की प्रतियाँ साध्वीजी को सौंपी। साध्वीजी ने सभी को गुरूदेव की विचार धारा के अनुरूप कार्य करने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम के बाद साध्वीजी जैन श्री गौतम ओसवाल आदि अन्य गुरू भक्तों एवं डिफेंस कॉलोनी नई दिल्ली अहिंसा विहार में श्री महेन्द्रसिंह डागा गुट में विवाद की स्थिति के बाद दो जगहों से संस्था का संचालन चल रहा था और इस बारे में न्यायालय, उच्च न्यायालय आदि न्यायालयों में विवाद के प्रकरण पंजीबद्ध थे और कई बार जैन एकता के प्रयास हुए। लेकिन किसी ना किसी कारणवश सफलता नहीं मिल पाई। दिनांक 26 जुलाई 2022 मंगलवार को वह ऐतिहासिक क्षण पूज्य गुरूदेव के आशीर्वाद स्वरूप एकता का स्वरूप स्थापित हुआ था और बातचीत होकर दोनो पक्षों की बैठक अहिंसा भवन शंकर रोड़ आचार्य सुशील आश्रम में सम्पन्न हुआ था ।


म.सा. के साथ सभी गुरू भक्त श्रावक डिफेंस कॉलोनी स्थित सर्वप्रथम जंगरावा वाले बाबा दादा गुरूदेव रूपचंदजी म.सा. की समाधि पर एवं पूज्य गुरूदेव हम भक्तों के भगवान आचार्य सुशीलमुनिजी म.सा की समाधि पर गुरूदेव के श्री चरणों में एमओयू (रूशह्व) की प्रतियाँ एवं एवं लड्डु की प्रसाद के रूप में अर्पण करके सभी को प्रसाद वितरित कर सभी ने मिलकर (दोनों पक्षों) ने जयकारे के साथ प्रसाद बांटकर ऐतिहासिक क्षण को स्थापित करते हुए गुरूदेव अचार्य सुशीलमुनि जी म.सा. के देवलोकगमन के लगभग 28 वर्ष बाद यह ऐतिहासिक पल आया और इसकी जानकारी देशभर के गुरूभक्तों को सूचना के माध्यम से सोशल मीडिया के माध्यम से मिली तो गुरूभक्तों में खुशी और हर्ष का माहौल व्याप्त हो गया और सभी ने एक-दूसरे को बधाई दी ।


क्योंकि पूज्य गुरूदेव आचार्य सुशीलमुनीजी म.सा. ने अपने समय समग्र जैन समाज में एक एकता का वातावरण पूरे विश्व में निर्मित करने की दिशा में एवं भारतीय जैन संस्कृति के विश्व व्यापी प्रचार-प्रसार जैन समाज के शास्त्रों में अर्हत जैन योगा के माध्यम से विश्व के कईदेशों में गुरूदेव के प्रयासों से ध्यान योगा का प्रचार-प्रसार कर एक संदेश पूरे विश्व को देते हुए एक समग्र जैन समाज को उस वक्त की सोच और विचारधारा में गुरूभंगवतों के आशीर्वाद से क्रांतिकारी कार्य पूरे विश्व में जैन आचार्य सुशीलमुनिजी म.सा. ने स्थापित किया था एवं समग्र समाज में भारतीय संस्कृति, सनातन संस्कृति, जैन संस्कृति आदि संस्कृतियों पर एकता के प्रयास में विश्वव्यापी कार्य करते हुए विश्व और देश में धरती बचाओ पृथ्वी बचाओ, पर्यावरण बचाओ आदि प्रमुख समस्याओं पर विश्व का ध्यान तत्कालीन राष्ट्राध्यक्षों, सभी धर्माचार्योंके एक सम्मेलन में विदेश की धरती पर शंखनाद किया था। भारत में भी 1994 में गुरूदेव के सानिध्य में विश्व धर्म एवं सर्वधर्म एकता पर नई दिल्ली के प्रांगण में सम्मेलन के माध्यम में नई जाग्रति का शंखनाद किया था। लेकिन हमें यह पता नहीं था कि गुरूदेव अचानक ही कुछ समय में हम गुरूभक्तोंको अकेला छोड़ कर देवलोक प्रस्थान कर जाएंगे। करीब तीन दशक के विवाद को समाप्त होने के बाद दोनो पक्षों के श्रावकों में एकता का वातारवण निर्मित होकर नया संदेश स्थापित हुए ।

गुरुदेव की झलकियां