
नई दिल्ली/कोडरमा। जैन संत परम तपस्वी अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी मुनिराज ससंघ उपाध्याय मुनि 108 श्री पियूष सागरजी महाराज के संघ कुलचाराम तेलंगाना से नागपुर, कुंडलपुर, छतरपुर, सोनागिरजी, कानपुर, मुकतेश्वर, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, हरिद्वार, होते हुए लगभग 2800 किलोमीटर की अहिंसा संस्कार पदयात्रा पैदल पूरी करके देश की राजधानी दिल्ली मे प्रवेश किया है। आज भारत गौरव साधना महोदधि सिंहनिष्कड़ित व्रत कर्ता अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं सौम्यमूर्ति उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी महाराज ससंघ का सुबह का पदविहारश्री शांतिनाथ दिगम्बर जेन मंदिर, सेक्टर 16 अ, रोहिणी, दिल्ली सेश्री 1008 महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, G3/53, पाकेट 1, सेक्टर 11 ऋ रोहिणी, दिल्ली ,से मंगल विहार करते हुवे रोहिणी प्रीतमपुरा पहुँचे जहाँ दिल्ली के इतिहास में प्रथम बार धर्म प्रभावना मंदिर में पैर रखने की जगह नही बची पूरा मंदिर खचाखच भर कर विधान ओर अभिषेक में हिस्सा लिया ओर पूरा रोहिणी केसरिया मय हो गया।
इस अवसर पर उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने कहा की दिल्ली की भक्ति अपरम्पार है सभी लोग प्रातः 4 बजे से पहुँच कर जाप ओर दीप अर्चना करते हुवे अभिषेक पूजा पाठ गुरुभक्ति में तत्पर लगे हुवे है इस भीषम गर्मी में भी भक्त AC छोड़ गुरु सेवा में लगे है सभी को बहुत बहुत आशीष देते हुवे कहा की रोज खुश और प्रसन्न रहना चाहते हो तो,, सुबह उठकर अपना चेहरा दर्पण में देखो, और खुद को देखकर मुस्कुराओ..!
आप अपनी सुबह की शुरुआत इस छोटे से कार्य से कर सकते हैं। जब सोकर उठो तो माता पिता, गुरु और प्रभु को धन्यवाद दो। फिर अपने आप से कहो कि मैं सौभाग्य शाली हूँ जो मुझे मनुष्य जीवन मिला, अच्छे माता पिता, धर्म और गुरु की शरण मिली। अन्यथा मैं जन्मों जन्मों से भटक रहा था। जन्म तो मिल रहा था लेकिन ना दिशा थी, ना बोध। मनुष्य जीवन में दिशा भी है, बोध भी है और अच्छा बुरा करने का विवेक भी है। इसलिए मनुष्य जीवन में कोई भी कार्य करो, तो कार्य करने के पहले उसके अन्जाम को देख लो फिर वह कार्य करो। जैसे —
गाली गलौच का अन्जाम क्या होगा -?
मिर्ची ज्यादा खाने से अन्जाम क्या होगा -?
गलत करने का अन्जाम क्या होगा -?
10 मिनट विचारों से मुक्त होकर अपने आप को देखो, खुद से प्रेम करो और खुद की आवाज सुनो.. फिर खुद से कहो — अब ढोंग की नहीं, ढंग की जिन्दगी जीना है। दूसरों को नहीं, अब खुद को सम्भालना है।
दुनिया को सम्भालते और समझाते समझाते दांत ढ़ीले हो गये, आँखे मिचमिची हो गई, कान बहरे हो गये, हाथ पैर लड़खड़ा गये लेकिन परिवर्तन नहीं आ पाया। अब स्वयं से शुरूआत करो दिन और परिवर्तन की।
वो ऐसा है, वो वैसा है ये सब छोड़ो, ये देखो मैं कैसा हूँ…!!!
प्रवचन पश्चात गुरुदेव प्रतिदिन की भाती इस विषम गर्मी में धूप में बैठ कर सामयिक ओर जाप कर रहे है लोग गुरु के इस तपस्या को देख कर नमन कर रहे है इस कार्यक्रम में समाज के साथ कई राजनीतिक हस्तियाँ भी दर्शन को पधार रहे है। संघपति दिलीप जैन हुम्मड,,हैदराबाद के मनोज जैन,कोलकोत्ता से विवेक जैन गंगवाल ,कोडरमा से मनीष जैन सेठी,कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा,ने गुरुदेव के चरणों मे अपनी नमोस्तु अर्पित किया।