
रतलाम । कालिका माता सत्संग हॉल में रत्नावत परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन कथावाचिका देव प्रिया माही किशोरी श्री धाम वृंदावन में भगवान कृष्ण की लीलाओं तथा श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का सजीव वर्णन किया। प्रातः काल तुलसी विवाह का आयोजन किया गया । भगवान की मेहदीकुई बालाजी मंदिर से झूमते गाते ढोल ढ़माके से बारात निकाली गई जो कथा स्थल पहुची तथा तुलसी विवाह संपन्न हुआ तुलसी विवाह के पश्चात कथा के प्रारंभ में मुख्य जजमान हरिश्चंद्र ,मधुबाला, शशांक व चहेती रत्नावत ने पोथी पूजन किया।
कथा वाचिका माही किशोरी ने कहा कि कथा श्रवण करने के लिए कोई पंडाल जरूरी नहीं है यदि व्यक्ति का मन हो तो हर घर में तीर्थ है । उन्होंने सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव बताते हुए कहा कि व्यक्ति भगवान की कथा सुनने की जगह सोशल मीडिया में अपना कीमती समय नष्ट करता है यदि किसी व्यक्ति को भगवान की कथा सुननी है तो वह अपने घर में मोबाइल में यूट्यूब पर अथवा टीवी के माध्यम से भी भगवान की कथा का श्रवण कर सकता है । उन्होंने कहा कि भगवान का नाम जपने के लिए हाथ में माला होना जरूरी नहीं है यदि व्यक्ति सच्चे मन से मन में भगवान के नाम का जाप करें तो भी प्रतिफल मिलता है । उन्होंने कहा कि जब बृजवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की तो देवराज इंद्र नाराज हो गए तथा उन्होंने सावरकर नाम के मेघ को ब्रजमंडल में घनघोर वर्षा कर ब्रज को पानी में डूबाने का आदेश दिया इंद्र के आदेश के बाद पूरे ब्रजमंडल में पानी पानी हो गया बृजवासी घबराकर श्री कृष्ण की शरण में पहुंचे व कहने लगे हे कृष्ण हमारी रक्षा करो रक्षा करो जब भी जीवन में संकट आए तो हमें भगवान की शरण में जाना चाहिए व सहायता मांगना चाहिए भगवान अपने भक्तों की अवश्य रक्षा करते हैं उसी प्रकार ब्रजवासियो द्वारा सच्चे मन से की गई प्रार्थना को श्री कृष्ण ने स्वीकार किया तथा गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण कर लिया तथा सभी बृजवासियों को पर्वत के नीचे बुला लिया व इंद्र के प्रकोप से रक्षा की। जब इंद्र को मालूम हुआ कि सभी बृजवासी सुरक्षित हैं तो उसे लग गया श्री कृष्ण कोई साधारण इंसान नहीं है वह तो साक्षात भगवान नारायण का स्वरूप है इंद्र ने ब्रजमंडल जाकर श्री कृष्ण से अपने कृत्य के लिए माफी मांगी। भगवान कृष्ण रुक्मणी विवाह का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मणी जी विदर्भ की राजकुमारी थी तथा उन्हें भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जी का अवतार भी माना जाता है रुक्मणी जी का कृष्ण के प्रति प्रेम मानवीय भावनाओं और आध्यात्मिक भक्ति का मिश्रण था जब भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी का हरण कर ले जा रहे थे तो उनके भाई रुक्म ने भगवान श्री कृष्ण से भयंकर युद्ध किया व परास्त हुए भगवान श्री कृष्णा विजयी हुए इसके बाद श्री कृष्ण रुक्मणी को लेकर द्वारिका आ गए तथा दोनों ने का विवाह संपन्न हुआ ।कथा के दौरान भजन मंडली के आयुष व्यास, शिवम राठौड़, प्रद्युम्न धारवा ने सुमधुर स्वरों में छोटी-छोटी गईया छोटे छोटे ग्वाल छोटो सो मेरो किशन गोपाल सहित विभिन्न भजन प्रस्तुत किये जिन पर श्रद्धालु जमकर थिरके। इस दौरान पोरवाल समाज के राकेश पोरवाल, वंदना पोरवाल, मनोहर पोरवाल, प्रवीण फरक्या, अखिलेश गुप्ता, लता सेठिया, राजेंद्र पोरवाल सहित विभिन्न नागरिकों ने रत्नावत परिवार तथा कथावाचीका का सम्मान किया ।
आज के आयोजन में दंडी स्वामी आत्मानंद सरस्वती,श्रंगेरी मठ,महर्षि संजय शिवशंकर दवे के प्रवचनों का लाभ मिला। ब्रम्हकुमारी की दीदियों द्वारा स्वागत किया गया । अंजली कुमार सम्भव पोरवाल,गायत्री बालाराम चौधरी,निर्मला बाबूलाल चौधरी,संतोष गोपाल वेद,मनोहर पोरवाल,गोपाल मजावड़िया,संजय व्यास, दीपक पुरोहित,उषा मुरली खंडेलवाल,कांतिलाल पंड्या,ज्योति,जयश्री सुधीर पंचारिया,यश वेद, नरेंद्र सेठिया आदि मौजूद थे अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गई।