



रतलाम 29 अप्रैल। आवरण हटने पर ही सिद्धांत से दृष्टांत सरल हो जाता है और समझने में आ जाता है । अपने अन्तर्मन को पहले धो लो और फिर रंग लो । अपने मन को प्रभु के मन में डुबो कर धो लो और शास्त्रों के प्रभाव से उसे विभूषित कर लो। तो जीवन आनंददायक हो जाएगा । अतिथि का मान पहले अपना बाद में यही सेवा है । सेवा का नाम ही भक्ति है। माया के रूप अनेक होते है। माया जब हट जाती है तो जीव को ब्रह्म का साक्षात्कार हो जाता है। राम ही ब्रह्म है । जैसे सूर्य के उदय होने पर अंधेरा नहीं होता लेकिन कभी-कभी कोहरा या बादल हो जाने से सूर्य दर्शन नहीं होते तब ऐसा वातावरण बनाओ का कोहरा एवं बादल हट जाए । ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त करने के लिए युक्ति करो, प्रयास करो, पूरे मन से जतन करने से ब्रह्म की प्राप्ति होती है । अंदर की मलिनता , अज्ञानता सत्संग से ही दूर होती है इसलिए जीवन में सत्संग जरूरी है । सेवा में इतने समर्पित हो जाओगी कि वह ब्रह्म तत्व आपके निकट हो जाएगा । भक्ति कहती है कि सबकी सेवा करो और ज्ञान कहता है सबका त्याग करो। भक्ति से और से ज्ञान से दोनो से ब्रह्म की निकटता आती है। ध्यान करने के लिए घर नहीं छोडऩा बल्कि घर की आसक्ति छोडना है। इसलिए गुरू के बिना ध्यान नहीं होता और गुरू के बिना ज्ञान नहीं मिलता ।
उक्त वक्तव्य अखिल भारतीय रामायण मेला के विश्रांति दिवस पर भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ ने अपने मुखारविंद से जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहें ।
त्रिवेणी मेला ग्राउण्ड के पास स्थित शिवालय कॉलोनी में चल रहे अखिल भारतीय रामायण मेले में स्वामी देवस्वरूपानंद जी अखंड ज्ञान आश्रम ने भी भक्तजनों को सम्बोधित किया। कथा के प्रारम्भ में श्रीमती भव्या गौरव दवे द्वारा रामचरितमानस का पूजन किया गया। साथ ही स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ द्वारा भरपुर वर्षा के लिए उपस्थित जनमानस के साथ प्रार्थना की गई । विश्रांति दिवस पर रामायण मेला संयोजक पं. राजेश दवे परिवार द्वारा स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ, स्वामी देवस्वरूपानंद जी एवं उपस्थित संत समुदाय का शाल श्रीफल से सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अंत में आरती कर प्रसादी वितरण की गई । इस अवसर पर शांतिलाल पाटीदार, दिनेश पाटीदार, निरंजन पंड्या, रामप्रसाद पाटीदार, रूपेश पाटीदार,सुनील राठौड़ सहित बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ध्रुव पारखी ने किया।