- मंगल प्रवेश कलश यात्रा के साथ महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश
- मंगल प्रवेश समारोह में राज्यपाल बागड़े सहित कई जनप्रतिनिधि हुए शामिल

भीलवाड़ा 8 जुलाई। धर्मनगरी भीलवाड़ा में जिनशासन के प्रति श्रद्धा व भक्ति से ओतप्रोत श्रावक-श्राविकाओं का सैलाब मंगलवार को श्रमण संघीय जैन दिवाकरीय मालव सिंहनी पूज्या श्री कमलावतीजी म.सा. की सुशिष्या अनुष्ठान आराधिका पूज्य महासाध्वी डॉ. श्री कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा 4 के चातुर्मासिक मंगल प्रवेश कलश यात्रा व समारोह में उमड़ पड़ा। श्रद्धा का सैलाब ऐसा था कि जहां तक नजर पहुंचे जिनशासन आराधक ही नजर आ रहे थे। आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति सुभाषनगर के तत्वावधान में होने जा रहे चातुर्मास के लिए शिवाजी पार्क के पास स्थित सुनीलकुमार सुराणा के निवास से महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में भव्य मंगलप्रवेश कलश यात्रा शुरू हुई। सुभाषनगर स्थानक पहुंची मंगलप्रवेश कलश यात्रा में सैकड़ो श्राविेकाएं चुंदड़ पहन सिर पर मंगल कलश धारण करके चल रही थी। प्रवेश यात्रा में भगवान महावीर, जैन धर्म ओर जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. के जयकारे गूंजायमान होते रहे। मंगल प्रवेश यात्रा में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों व महापुरूषों तथा राजस्थान के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने वाली संजीव झांकिया भी आकर्षण का केन्द्र रही।
प्रवेश यात्रा में शामिल महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के दर्शन एवं एक झलक पाने के लिए श्रावक-श्राविकाओं के साथ हर वर्ग के लोग आतुर दिखे। मंगल कलश प्रवेश यात्रा के बाद मंगल प्रवेश कार्यक्रम आरसी व्यास कॉलोनी में गेट नंबर 33 के पास स्थित धांधोलाई स्कूल ग्राउण्ड में आयोजित हुआ। इसके लिए विशाल वाटरप्रूफ पांडाल तैयार किया गया था। महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में मंगल प्रवेश कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल हरिभाउ बागड़े थे जबकि अध्यक्षता मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने की। राज्यपाल बागड़े ने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि,संयम ओर सामाजिक सद्भाव का विशेष काल है,जिसमें साधु संत एक स्थान पर ठहरकर ध्यान साधना ओर तपस्या करते है ओर समाज को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देते है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म जीवदया,अहिंसा ओर आत्मशुद्धि का प्रतीक है। चातुर्मास के माध्यम से इन मूल्यों को जनमानस तक पहुंचाया जाता है। सच्चा संत वहीं है जो परमार्थ के लिए कार्य करता है ओर ऐसा करना ही सच्ची सिद्धी है।
महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. ने धर्मसंदेश प्रदान करते हुए कहा कि भगवान महावीर की परम्परा में वर्षावास का विशेष महत्व है। वर्षावास में अधिकाधिक तप,जप,सामायिक ओर धर्म आराधना हो ओर जन-जन तक भगवान महावीर का संदेश पहुंचाने वाला रहे। यह चातुर्मास धर्म ओर त्याग की दृष्टि से प्रेरणादायी बने इसके लिए तन,मन ओर धन से जुड़े ओर मानव सेवा के कार्य हो। उन्होंने वर्ष 2012 में भीलवाड़ा में किए गए चातुर्मास का स्मरण करते हुए कहा कि भीलवाड़ावासियों से जो स्नेह ओर अपनत्व मिला उससे ओर दौलतजी-निर्मलाजी भड़कत्या की भावना थी कि यहां चातुर्मास करें। चिंतन जागृत हुआ ओर भीलवाड़ा संघ तैयार हुआ तो साध्वी मण्डल चातुर्मास के लिए फिर भीलवाड़ा पहुंचा है। उन्होंने सबके सुखद आध्यात्मिक जीवन के लिए मंगलभावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भीलवाड़ा में 12 भावना रूपी 12 चातुर्मास है जहां मन लगे वहां जाकर जिनवाणी अवश्य श्रवण करें। स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा., ने भजन के माध्यम से जिनशासन भक्ति की प्रेरणा प्रदान की। साध्वी मण्डल ने शुरू में नवकार महामंत्र एवं मंगलकारी स्त्रोतों की आराधना की। समारोह में वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा.,विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा.आदि ठाणा का सानिध्य प्राप्त हुआ। समारोह के शुरू में ध्वजारोहण बिजयनगर से पधारे ओमप्रकाश अशोककुमार श्रीश्रीमाल ने किया। समारोह में भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल, विधायक अशोक कोठारी,जब्बरसिंह सांखला,गोपाल खण्डेलवाल, चन्द्रभानसिंह आक्या,नगर निगम महापौर राकेश पाठक,भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशान्त मेवाड़ा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शांतिलाल पोखरना, दिलीप नाबेड़ा,नेमीचंद धाकड़,अशोककुमार श्रीश्रीमाल,डॉ.दामोदर लड्ढा,मीठालाल सिंघवी,सुशीलकुमार डांगी, आनंद चपलोत,कमलेश ढेलावत आदि उपस्थित थे। चातुर्मास समिति के संयोजक महावीरसिंह चौधरी ने कहा कि भीलवाड़ावासी सौभाग्यशाली है कि उन्हें महासाध्वी कुमुदलताजी का चातुर्मास प्राप्त हुआ है। वह जैन साध्वी नहीं होकर जिन साध्वी बन चुकी है जो सम्पूर्ण मानव कल्याण की भावना से जिनशासन के लिए समर्पित है। अतिथियों का स्वागत चातुर्मास समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या एवं सुभाषनगर श्रीसंघ के अध्यक्ष हेमन्त कोठारी, आशीष भड़कत्या ने किया। आभार संचालन करते चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि चातुर्मासिक दैनिक प्रवचन बुधवार से शुरू हो जायेगे। सुभाषनगर जैन स्थानक में प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक प्रवचन होंगे। आयोजन को सफल बनाने में सुभाषनगर श्रीसंघ के मंत्री बंशीलाल बोहरा, राजेंद्र चंडालिया,अनिल कोठारी सहित विभिन्न पदाधिकारियों ओर चातुर्मास समिति सदस्यों का सहयोग रहा। चातुर्मासिक मंगलप्रवेश कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुंबई,अहमदाबाद, सूरत,पूना,बैंगलोर,हैदराबाद,कोयम्बूटर, चितौड़गढ़,जयपुर, निम्बाहेड़ा,नीमच,मन्दसौर,रतलाम, इन्दौर,बिजयनगर, जावरा, गंगापुर, गुलाबपुरा, उदयपुर,कोटा,राशमी सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रावक-श्राविकाएं भीलवाड़ा पहुंचे थे।
मंगलप्रवेश यात्रा में सजीव झांकिया बनी आकर्षण का केन्द्र
भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश यात्रा में सबसे आगे चल रही सजीव झांकिया आकर्षण का केन्द्र रही। इन झांकियों के माध्यम से जैन संत के जीवन की झलक भी दिखी तो जैन धर्म के मूल सिद्धांतों का महत्व भी समझाया गया। राजस्थान के गौरवशाली इतिहास ओर परम्पराओं की झलक भी इन सजीव झांकियों के माध्यम से प्रदर्शित हो रही थी। शोभायात्रा में जैन धर्म के संदेश व चिन्ह प्रदर्शित करने वाली तख्तियां उठाए लोग चल रहे थे। प्रवेश यात्रा मार्ग पर जगह-जगह विभिन्न संगठनों ओर श्रावक परिवारों द्वारा स्वागत द्वार भी लगाए गए थे।
मंगल प्रवेश पर विभिन्न परिवार बने लाभार्थी
चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के अवसर पर नवकारसी के लाभार्थी सीए सुनीलकुमार सुराणा परिवार रहा तो गौतम प्रसादी का लाभ सुरेन्द्रसिंह, अमित, सुमित सुराणा परिवार भीलवाड़ा ने लिया। ध्वजारोहण के लाभार्थी राजाकांता देवी, ओमप्रकाश,अशोककुमार, अमितकुमार श्रीश्रीमाल परिवार जयपुर, केसर प्रभावना के लाभार्थी कीर्तिराज माधुरी,प्रेम दुग्गड़ परिवार पुणे एवं गुड प्रभावना के लाभार्थी नेमीचंद मोहनलाल कोचर परिवार नासिक रोड रहा।
पोखरना दंपति ने प्रदान की चातुर्मास की आज्ञा
मंगल प्रवेश यात्रा के बाद महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा चातुर्मास स्थल सुभाषनगर जैन स्थानक पहुंचे तो चातुर्मासिक प्रवेश के लिए आज्ञा मुंबई से पधारे दंपति शांतिलाल पोखरना एवं सुशीला पोखरना ने प्रदान की। साध्वी मण्डल ने चातुर्मास आयोजन समिति, सुभाषनगर श्रीसंघ सहित वहां मौजूद सैकड़ो श्रावक-श्राविकाओं को आज्ञा देने वाला मानते हुए सबकी साक्षी में स्थानक में मंगल प्रवेश किया। इस दौरान जैन धर्म ओर साध्वी मण्डल के जयकारे लगते रहे।
विभिन्न संघों ने रखी चातुर्मास की विनती
इन्दौर,कोटा,बिजयनगर आदि स्थानों से पधारे श्रीसंघों के प्रतिनिधियों ने महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा से वर्ष 2026 का चातुर्मास प्रदान करने की भावपूर्ण विनती रखी। कुमुदलताजी म.सा. ने ऐसे संघों की विनती झोली में रखते हुए कहा कि अभी सबकी विनती झोली में रख रहे है ओर समय आने पर विचार किया जाएगा।
चातुर्मासिक दैनिक प्रवचन कल से
पूज्य महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में सुभाषनगर स्थानक में चातुर्मासिक धर्म आराधना बुधवार से शुरू हो जाएगी। चातुर्मास के दैनिक कार्यक्रमों के तहत सुबह 6.30 बजे से प्रार्थना, सुबह 8.45 से 10 बजे तक प्रवचन, दोपहर 2.30 से 4 बजे तक धर्मचर्चा एवं नित्य प्रतिक्रमण सूर्यास्त के बाद होगा।
चातुर्मास में हर गुरूवार सुबह मंगलकारी अनुष्ठान होगा। इसी तरह हर शुक्रवार को केवल श्राविकाओं के लिए सुबह 11 बजे पद्मावती एकासन आराधना विधि होगी। हर शनिवार को प्रवचन के बाद प्रश्नमंच एवं हर रविवार को ही दोपहर 2 बजे से बच्चों के लिए संस्कार शिविर का आयोजन होगा।