रतलाम । श्री दान प्रेम रामचंद्र सुरीश्वर जी आराधना भवन, जैन श्रीसंघ में इस वर्ष चातुर्मास हेतु परम पूज्य गणिवर्य कल्याण रत्न विजय जी म.सा. के प्रथम शिष्य निःश्रेयस विजय जी म.सा. आदि ठाणा चार आराधना भवन में विराजित हैं। आपके प्रतिदिन 9 :15 से 10:30 बजे तक प्रवचन प्रारंभ हो चुके हैं। पूज्य गुरुदेव की निश्रा में पूज्य निःश्रेयस विजय जी म.सा. ने महती धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि चातुर्मास काल अपने जीवन में कल्याण करने का सर्वांगीण अवसर है। नित्य प्रवचन श्रवण करने से धर्ममय संस्कारों का बीजारोपण होता है, जिसके आधार पर अपना यह भव और आने वाले भव को सुधारा जा सकता है।
इस अवसर पर दीपक कटारिया ने जानकारी देते हुए बताया कि संघ में 13 जुलाई से 25 दिवसीय इंद्रिय जप तप प्रारंभ हो रहा है, जिसमें पहले दिन परीमूढ़, दूसरे दिन एकासना, तीसरे दिन नीवी, चौथे दिन आयम्बिल एवं पांचवें दिन उपवास ऐसे 25 दिन तक चलेगा। पांच इंद्रिय निरंतर हमें पाप में जोड़े रखती है। इंद्रियों पर विजय करने वाला व्यक्ति पाप मुक्त बन सकता है।
संघ के वरिष्ठ हिम्मत गेलड़ा ने पुण्यशाली श्रावक श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में उक्त तप में भाग लेकर धर्म आराधना करने का निवेदन किया है तप हेतु नाम अमृतजी जैन को अपने नाम लिखाने हेतु निवेदन किया है, जिससे तपस्वियों की सुंदर व्यवस्था करने में सुविधा रहे।