- जीवदया व मानव सेवा के प्रेरक पूज्य मिश्रीमलजी एवं रूपचंदजी म.सा. का जीवन जिनशासन के लिए समर्पित
- महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में गुरू मिश्री रूप रजत जयंति पर गुणानुवाद

भीलवाड़ा 3 अगस्त। राजस्थान की पावन धरा महान संतों,वीरों व योगियों की भूमि है। इस धरा पर श्रमण सूर्य मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. एवं लोकमान्य संत शेरे राजस्थान रूपचंदजी म.सा. जैसे महान संत हुए। अद्भुत वाणी के माध्यम से इन संतों ने लोगों का जीवन बदल दिया ओर सबका भला किया। जैन ही नहीं हर जाति वर्ग के लोग उनके प्रति आस्थावान बने। जिनशासन के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले इन महान संतों की जीवदया के लिए दी गई प्रेरणा से मारवाड़ के गांव-गांव में गौशाला,बकराशाला व कबुतरखाना खुले। ये विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में रविवार को धर्मसभा में मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. की 135वीं एवं लोकमान्य संत वरिष्ठ प्रवर्तक रूपचंदजी म.सा. की 98वीं जयंति के उपलक्ष्य में गुणानुवाद करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुणानुवाद के माध्यम से भावाजंलि अर्पित कर यहीं कामना करते है कि उनकी आत्मा भव भ्रमण पूर्ण कर सिद्ध बुद्ध मुक्त अवस्था को प्राप्त हो। इस अवसर पर महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. ने कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने की प्रेरणा देते हुए धर्मसभा में मौजूद सभी श्रावक-श्राविकाओं को संकल्प दिलाया कि न तो वह सोनोग्राफी के माध्यम से भ्रूण परीक्षण करेंगे,न कराएंगे ओर न ही ऐसा करने वालों की अनुमोदना करेंगे। उन्होंने समाज की युवा बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि लव मैेरिज की बजाय वहीं विवाह करें जहां माता-पिता की भी सहमति हो क्योंकि वहीं उनके सच्चे हितेषी होते है। धर्मसभा में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा. ने कहा कि अनंत पुण्योदय होने पर जिनवाणी सुनने को मिलती है। अपनी आत्मा के भीतर जाएंगे तो संसार सागर से तिर जाएंगे पर भीतर जाने के लिए जागृत स्वयं को होना पड़ेगा। अमृत जैसे जीवन को विषय विकारों से मत खराब करे। उन्होंने पूज्य मिश्रीमलजी म.सा. एवं रूपचंदजी म.सा. की जयंति पर उनके प्रति भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महापुरूषों की जयंति मनाना तब अधिक सार्थक हो जाएगा जब वह हमारे जीवन में बदलाव का माध्यम बने। साध्वीश्री ने भजनों एवं गीतों के माध्यम से गुरू भक्ति एवं प्रेरणादायी संदेश दिए। धर्मसभा के शुरू में वास्तुशिल्पी पद्मकीर्तिजी म.सा. एवं साध्वी मण्डल ने दिवाकर चालीसा का पाठ कराया। इसके माध्यम से पूज्य जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. के प्रेरणादायी जीवन की आराधना की गई। धर्मसभा में विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
ऐसे मित्रों की संगत करो जो जीवन की रंगत बदल दे
साध्वी कुमुदलताजी म.सा. ने मित्रता दिवस पर संदेश प्रदान करते हुए कहा कि जिंदगी में मित्र होना बहुत जरूरी है। मित्र ही ऐसा रिश्ता है जिसका चयन हम खुद कर सकते है। मित्र अच्छा होने पर जीवन संवर जाता है ओर मित्र गलत मिल जाने पर जीवन की नैया डूब जाती है। कृष्ण-सुदामा मित्रता के श्रेष्ठ प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मित्र हमेशा सोच समझकर बनाए ताकि धोखा नहीं खाना पड़े। हमारे मित्रों की जैसी संगत होगी उसी से हमारी इमेज बनेगी। इसलिए मित्रों की ऐसी संगत करो जो जीवन की रंगत बदल दे। संतों की संगत भी जीवन बदल देती है।
नाटिका से दिया कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने का संदेश
धर्मसभा में साध्वी मण्डल की प्रेरणा से सुभाषनगर कन्या मण्डल ने प्रेरणादायी नाटिका की प्रस्तुति दी गई। इसके माध्यम से बताया गया कि किस तरह परिवार में भाई को बहन की कमी महसूस होती है ओर वह अपने माता-पिता से एक बहन की मांग करता है। नाटिका के माध्यम से संदेश दिया गया कि परिवार में बेटे के साथ बेटी भी जरूरी है ओर प्रसव से पूर्व भ्रूण परीक्षण करा कन्या भ्रूण हत्या नहीं करेंगे। नाटिका का संचालन नेहा छाजेड़ एवं पिंकी चीपड़ ने किया। इसमें प्रस्तुति देने वालों में आरवी जैन,नानवी जैन, ताशु जैन, सृष्टि जैन,सुभी जैन, अंश जैन, काव्या जैन, हनी जैन आदि शामिल थे।
सामूहिक तेला तप आराधना को लेकर उत्साह का माहौल
चातुर्मास में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व शुरू होने पर 20 से 22 अगस्त तक होने वाली सामूहिक तेला तप आराधना की जाएगी। महासाध्वी मण्डल द्वारा प्रतिदिन श्रावक-श्राविकाओं को तेला तप करने की प्रेरणा से उत्साह का माहौल है। अब तक सैकड़ो श्रावक-श्राविका इसके लिए नाम दे चुके है। धर्मसभा में बिजयनगर से 108 एवं बेंगू से 54 श्रावक-श्राविकाओं के तेला तप कराने की भी भावना जताई गई। तेला तपस्वियों के लक्की ड्रॉ भी निकाले जाएंगे। धर्मसभा में कई श्रावक-श्राविकाओं ने तेला,उपवास,आयम्बिल,एकासन आदि तप के प्रत्याख्यान भी लिए। धर्मसभा में बेंगू से मजिस्ट्रेट पीयूष ढेलिया श्रीसंघ के साथ पधारे थे। श्रीसंघ में पूर्व पालिकाध्यक्ष वृद्धिचंद कोठारी, अध्यक्ष धर्मीचंद रातड़िया, मंत्री राजुलेन्द्र सुराना,नवनीत पगारिया, राहुल रातड़िया आदि शामिल थे। अतिथियों का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या, सचिव राजेन्द्र सुराना, जीतो भीलवाड़ा के पूर्व अध्यक्ष सुशीलकुमार डांगी,शांतिलाल पानगड़िया, सुभाषनगर श्रीसंघ के मंत्री बंशीलाल बोहरा, अनिल कोठारी, नितिन बापना, मनीष सेठी, आशीष भड़कत्या आदि पदाधिकारियों द्वारा किया गया। धर्मसभा में जीतो भीलवाड़ा चैप्टर अध्यक्ष मीठालाल सिंघवी, शांतिभवन श्रीसंघ के संरक्षक नवरतनमल बम्ब भी मौजूद थे। वैरागन बहन प्रियांशी एवं लक्ष्मी ने भी भजन की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया।
प्रशनमंच में उत्साह के साथ महिलाओं ने की सहभागिता
वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. एवं विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. के सानिध्य में शनिवार दोपहर महिलाओं के लिए प्रश्नमंच का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साह के साथ सहभागिता की। प्रश्नमंच में कोमल बाबेल व आशा लोढ़ा प्रथम, रश्मि लोढ़ा व सुनीता हिंगड़ द्वितीय एवं हेमा डूंगरवाल व अनिता नंदावत तृतीय स्थान पर रहे। प्रश्नमंच का संयोजन लाड़जी मेहता, टीना बापना, राखी खमेसरा,विमला गोखरू,शकुन्तला खमेसरा,नेहा छाजेड़ आदि ने किया।