कबूतर राष्ट्र का प्रतीक हैं, राष्ट्र के सभी लोग धर्म , जाती भूलकर , भारतीय होकर इनको बचाने निकले है : हार्दिक हुंडीया

मुंबई (अभय सुराणा) । कबूतर का हर धर्म में एक अलग स्थान है , सभी धर्मो के लोगो कबूतरो को दाना देते है , हमारे पूर्वजों भी कई सालों से कबूतरो को दाना देते आरहे हैं , ऐसे ही दादर में दादर कबूतर खाना नाम नहीं पड़ा बुजुर्ग से ले के बच्चे तक कई सालों से दाना डालते है वो भी मुंबई का वो स्थान जो कबूतर खाना मुंबई की शान है
हार्दिक हुंडिया का सवाल है की यदि दादर कबूतर खाना बीमारी का स्थान होता तो क्या ? इतने सालों से लोग कबूतरों को दाना डालते ?
हम बड़े भाग्यशाली है की कबूतरो को बचाने के लिये लगे है , लेकिन उनको कैसे माफ़ करे जिन्होंने राष्ट्र के शांति के प्रतीक कबूतरो को मरने के लिये मजबूर भी किया और तड़फ़ तड़फ़ कर हजारो कबूतर मर गए
हे सरकार जरा सोचो !
कहीं कबूतर में आप की आत्मा होती तो ? और आप को कोई बचाता , आप को दाना पानी देता ? तो क्या आप उनके पर एक आई करते ? आप ने जो राष्ट्र में जन्म लिया है वो ही राष्ट्र में हम सभी के राष्ट्र के शांति के प्रतीक कबूतरो भूखे , तरसे, तड़फ़ तड़फ कर मर जाए ? ऐसा काम कर रहे हो ? वो तो शांति का प्रतीक है आप तो बोलते जीव हो , किसी की मजबूरी समझते हो ?
जो मजबूर है उनको तो मदद करनी चाहिये,उनको मरने के लिये छोड़ देना ? ऐसा काम करे वो क्या भारत माता का संतान हो सकता है ?
धन्यवाद है वो महिलाओ को जिन्होंने अबोल जीवो के प्रति उनकी अनमोल भक्ति दिखाई और कबूतर खाना पे कबूतरो का हक्क है वो उनको वापस दिलाया । ये कबूतर खाना पर कबूतरों का हक्क है ! हार्दिक हुंडिया की दो हाथ जोड़कर विनती है की जो भी कहते है की कबूतरों से बीमारी होती है तो उनसे फिर से हार्दिक हुंडिया की दो हाथ जोड़कर बीनती है की आप दुनिया को दिखाये की आप के परिवारमें , जान पहचान में किसी को कबूतरो से बीमारी हुई हो तो बताये ?
कबूतरोकी ये घटना ने समाज को एक बात तो शिखा दी है की जीवदया के नाम पे धंधा कौन करता है और रियल जीव दया कौन करता है ?
संत निलेश मुनि को धन्यवाद है जिन्होंने समाज में जागृति लाई और जो कानूनी लड़ाई कबूतरो के लिये न्याय मंदिर में लड़ रहे है पल्लवी पाटिल , स्नेहा विसारिया, सविता महाजन इन तीनों बहनो को कोटि कोटि वंदन है और जो कबूतरो के नाम ख़ुद की रोटी शेक रहे है उनको सदबुद्धि हो ।