

रतलाम 8 अगस्त । श्रुति संवर्धन वर्षा योग 2025,श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर स्टेशन रोड, रतलाम आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी म. सा. के शिष्य मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी म.सा. एवं क्षुल्लक 105 श्री परम योग सागर जी म.सा. द्वारा चंद्रप्रभा मंदिर पाट पर विराजित है।
प. पू. मुनि श्री 108 श्री सद्भाव सागर जी मसा ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि अंतस में जब समर्पण के परिणाम होते हैं तो सहज ही विशाल से विशाल कार्य संपन्न होते देखे जाते हैं। इसके लिए आस्था को प्रबल करना होगा। सबसे पहले आस्था आएगी तो अच्छे कर्म होंगे उसी से मोक्ष गति प्राप्त होगी।
कॉन्फिडेंस लेवल इस द की ऑफ़ सक्सेस एंड द फर्स्ट यूनिवर्सल रूल इस द फेथ। आस्था जितनी पवित्र है उतने उतने कार्य अलग-अलग रास्ते से होकर एक ही मार्ग पर पहुंचते हैं। अगर आप नवकार मंत्र का 8.25 करोड़ मंत्र का जाप कर लेते हो तो उसे निश्चित ही मोक्ष गति प्राप्त होती ही है। इसीलिए हमें जप अधिक से अधिक करना चाहिए और जप में जिसका नाम होता है वह महापुरुष होते हैं और उनका नाम लेने से ही बिगड़े हुए कार्य सुधर जाते है और अगर चित्त में आस्था निर्मल है तो पुण्य की वृद्धि होती है।
जाति,कुल, देश बढ़ाना चाहते हो तो अपना चारित्र बढ़ा लो।भगवान राम ने भी अपना चारित्र बढ़ाया और मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। अगर पुण्य नहीं बढ़ा सकते तो पाप मत बढ़ाओ इसके लिए आपको अपनी आदतों पर कंट्रोल करना पड़ेगा। क्योंकि एक अच्छी आदत भविष्य बना सकती है और एक बुरी आदत जीवन को बर्बाद कर सकती है। आदत अच्छी या बुरी कर्म पर निर्भर है। अच्छे कर्म होंगे तो आदत अच्छी होगी और बुरे कर्म होंगे तो आदत भी वैसी ही रहेगी इसलिए डिफाल्टर नहीं बनना है। जन्म देना ही पिता का धर्म नहीं है उन्हें संस्कार देना भी पिता का धर्म है और अगर खोटी आदत पड़ जाए तो समाज में विकृति आ जाएगी और समाज का पतन हो जाएगा। इसलिए हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को अच्छी आदतें,अच्छे संस्कार देना है। माता-पिता का सम्मान रखना चाहिए।व्यसन नहीं करना चाहिए, पाप और दुर्बुद्धि नहीं से दूर रहना चाहिए। अशुभ कर्म करोगे तो उसका फल अशुभ ही होगा। व्यक्ति पाप मुस्कुराकर करता है और पाप कर्म का फल जब उदय होता है बिलख-बिलख कर रोता है हर पाप करने व्यक्ति जानता है फिर भी पाप कर्म करता है क्योंकि पाप के सत्यांश इतने अधिक होते हैं कि अपने आप को रोक नहीं पाता । संसार की सबसे बड़ी सेवा भूखे को खाना खिलाता है इसमें जीव को सुख मिलता है और पुण्यो का उदय भी होता है। मोक्ष जब होना है तब होगा मूल गुणो का अभ्यास करते रहना चाहिए जैसे जैन मुद्रा,मंदिर में दर्शन करना मंत्र जाप आदि।
पाप करने के पहले ही गिल्टी आ जाए तो वह जैन है और बाद में तो हर किसी को गिल्टी फील होती है और अगर फिर भी नहीं आए तो उसके जैसा निर्लज कोई नहीं होगा। धैर्यवान बनना चाहिए और अगर धैर्य को छोड़ोगे तो बैर भाव आएगा जिससे कर्म का बंधन होगा क्योंकि इंसान बनना बड़ी बात नहीं है महान इंसान बनना बड़ी बात है महान इंसान की बहुत सारी विशेषताओं में से एक विशेषता यह है कि वह धैर्यवान होता है। पुण्य महत्वपूर्ण है जो जीवन में उतना से अधिक लाभ प्राप्त होता है पुण्य के फल से ही मोक्ष मिलता है और मंत्र के द्वारा मन को स्तंभित करें उससे बड़े से बड़े कार्य सिद्ध होते हैं। उक्त विचार प्रवचन श्रृंखला में दिए।
चातुर्मास के दौरान चातुर्मास समिति एवं समाज जनों ने सवा करोड़ नवकार मंत्र का जाप प्रतिदिन श्री चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर पर सामूहिक रूप से रात्री 8:00 से 9:00 बजे तक किया जा रहा हैं। जिसे पूर्ण करने हेतु समाज जन मंत्र जाप में सहयोग कर लाभ प्राप्त करें। उक्त जानकारी श्री चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन श्रावक संघ रतलाम के संयोजक मांगीलाल जैन ने दी।