सुपात्र भावना से दान देने पर मोक्ष की प्राप्ति -कुमुदलताजी म.सा.

  • महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के सानिध्य में पर्युषण पर्व के प्रवचन एवं अन्य कार्यक्रम कल से अरिहन्त भवन में
  • श्रद्धा एवं भक्ति के साथ हुई तीर्थंकर अजीतनाथ भगवान की आराधना,तेला तपस्वियों का अभिनंदन कल

भीलवाड़ा,21 अगस्त। अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अष्ट दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन के दूसरे दिन गुरूवार को भी जिनवाणी श्रवण करने के लिए श्रावक-श्राविकाएं उमड़े। महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में पर्युषण पर्व के प्रवचन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम शुक्रवार 22 अगस्त से 27 अगस्त तक आरके कॉलोनी स्थित अरिहन्त भवन में होंगे। पर्युषण पर्व के दौरान अखण्ड नवकार महामंत्र जाप सुभाषनगर स्थानक में जारी है। सामूहिक तेला तप करने वाले तपस्वियों की अभिनंदन यात्रा शुक्रवार सुबह 7.30 बजे सुभाषनगर में लॉयन्स आई हॉस्पिटल के पास से अरिहन्त भवन तक निकाली जाएगी। साध्वी कुमुदलताजी म.सा. ने ‘‘दान की मिसाल देवकी रानी ममता की मिसाल मां’’ विषय पर प्रवचन में कहा कि मां की ममता कैसी होती है देवकी रानी के जीवन से सीखा जा सकता है। मां की ममता अनमोल होती है ओर वह हमेशा अपनी संतान का भला चाहती है। मां अपनी संतान की रक्षा के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती है। उन्होंने कहा कि सुपात्र भावना से दान देने पर मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देने की भावना हमेशा रहनी चाहिए। धर्मसभा में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा. ने मां की ममता ओर जैन धर्म का महत्व बताने वाले मधुर प्रेरणादायी भजनों की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में वास्तुशिल्पी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने अतंगडदशा सूत्र के मूल पाठ का वाचन एवं विवेचन करते हुए तीसरे अध्याय का श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व मन में क्षमा के भाव रखते हुए हर तरह के राग द्धेष खत्म करने का संदेश देता है। पर्युषण पर्व अष्ट कर्मो को नष्ट करने की साधना है। मिच्छामी दुक्कड़म की आठा माला फेरनी चाहिए इससे कर्मो का क्षय होता है। दोपहर में विद्याभिलाषी राजकीर्तिजी म.सा. द्वारा कल्पसूत्र का वांचन किया गया। पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार सुबह 8.30 बजे से अतंगडदशा सूत्र का वाचन होगा। इसके बाद महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में साधना की सरगम गज सुकुमाल विषय पर प्रवचन एवं दोपहर में जैन हाउजी प्रतियोगिता होगी।

प्रवचन से पूर्व तीर्थंकर अजीतनाथ भगवान की आराधना

हर गुरूवार को होने वाली अनुष्ठान आराधना के महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में दूसरे तीर्थंकर प्रभु अजीतनाथ की आराधना की गई। इसके माध्यम से सर्व मंगल व सुख शांति की कामना की गई। अनुष्ठान के प्रारंभ में महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में श्री व्रज पंज्जर स्तोत्र की आराधना की गई। अनुष्ठान शुरू होने से आध्यात्मिक चातुर्मास अयोजन समिति,सुभाषनगर श्रीसंघ के पदाधिकारियों एवं अतिथियों द्वारा नवकार मंत्र चौकी की विधिपूर्वक स्थापना की गई। अनुष्ठान आराधना का लाभ दो गुप्त परिवारों ने प्राप्त किया। धर्मसभा में भिवंडी से आए जीतू भाई जैन सहित अतिथियों का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा किया गया। संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया।

तेला तप आराधकों की अभिनंदन यात्रा कल सुबह

पर्युषण पर्व की आराधना में तप त्याय का ठाठ लगा हुआ है। महासाध्वी मण्डल की प्रेरणा से सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं सामूहिक तेला तप आराधना कर रहे है। इन तपस्वियों ने गुरूवार को बेला तप के प्रत्याख्यान लिए। तेला तप आराधकों की सामूहिक अभिनंदन यात्रा शुक्रवार सुबह 7.30 बजे सुभाषनगर लॉयन्स आई हॉस्पिटल के पास से अरिहन्त भवन तक निकाली जाएगी। चातुर्मास आयोजन समिति ने अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं से तपस्वियों के अभिनंदन यात्रा में शामिल होने का आग्रह किया है। तेला तप करने वाले तपस्वियों के सामूहिक पारणे शनिवार सुबह होंगे।

साप्ताहिक पद्मावती एकासन आराधना कल

साप्तहिक पद्मावती एकासन आराधना विधि का आयोजन शुक्रवार सुबह प्रवचन के बाद अरिहन्त भवन में होगा। एकासन आराधना में शामिल होने के लिए 550 से अधिक श्राविकाओं एवं श्रावकों ने पंजीयन कराया हुआ है। एकासन विधि सम्पन्न होने के बाद सामूहिक एकासन चातुर्मास समिति द्वारा सुभाषनगर स्थानक भोजनशाला में कराया जाएगा।