लेखक – अमित जैन एडवोकेट (चंदेरी)

कुछ दिनौं से मन बहुत व्यथित है, सोचा कि मन की व्यथा समस्त मुनि संघ, समस्त आर्यिका संघ एवं समस्त समाज जनौं तक पहुँचाऊॅं, जैंसा कि आप सभी लोगौं को विदित है, कि कुछ दिनौं पहले एक समाज जन बुजुर्ग ने अशोकनगर मैं निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के समक्ष एक जिज्ञासा रखी जिसको लेकर पूरे भारत वर्ष की जैन समाज मैं तनाव तथा बिखराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, समाज जनौं से विनम्रता पूर्वक एक आग्रह एक निवेदन करना चाहता हूँ, कि इस तरह की जिज्ञासायैं या मन के भाव सार्वजनिक मंचौं से उद्घोषित न करैं, और समाज के जिम्मेदार व्यक्तियौं से भी आग्रह और निवेदन करता हूँ, कि इस तरह की जिज्ञासाऔं को जिनसे समाज मैं तनाव और बिखराव की स्थिति उत्पन्न हौने की संभावना है, प्रचारित या प्रसारित न करैं और ना ही किसी अन्य को करने दैं । अगर किसी वजह से इस तरह की जिज्ञासायैं या किसी के मन के भाव सोशलमीडिया पर प्रचारित या प्रसारित हो। भी जायैं, तो धर्म को बचाने के लिये और समाज मैं सामंजस्यता बनाये रखने के लिये, समाजजन, मुनिसंघ एवं समस्त आर्यिका संघ सार्वजनिक मंचौं से ऐंसी जिज्ञासाऔं और किसी के मन के भावौं के प्रति, प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ भी गलत या अशिष्ट भाषा का उपयोग न करैं । क्योंकि वैंसे ही जैन धर्म और जैन समाज इस दुनिया मैं बहुत कम हैं, अगर मुनिसंघ, आर्यिका संघ, एवं समस्त जैन-जैनेत्तर समाज इसी तरह से सार्वजनिक मंचौं से, एवं सोशलमीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया स्वरूप अशिष्ट भाषा का उपयोग करते रहैंगे, तो समाज मैं तनाव तथा बिखराव की स्थिति उत्पन्न होती रहैंगी।
अत: धर्म और समाज से जुडे हौने के नाते, मैं (एड.अमित कुमार जैन चन्देरी) धर्म को चिरकाल तक इस दुनिया मैं बचाये रखने के लिये, समस्त मुनिसंघौं, समस्त आर्यिका संघौं एवं समस्त समाज जनौं से विनम्रता पूर्वक आग्रह एवं निवेदन करता हूँ । किसी भी चैनल या सोशलमीडिया के माध्यम से कोई प्रतिक्रिया न दैं, और इस अनिष्टकारी विवाद को यहीं समाप्त कर, निकट आ रहे सबसे बडे पर्व यानि पर्वराज पर्यूषण की तैयारियौं मैं जुट जायैं, एवं आत्म कल्याण एवं जनकल्याण के निमित्त कार्य करते हुये अपने जीवन को सफल बनायैं, मेरे शब्दों से या मेरी बातौं से, किसी के दिल को ठेस लगी हो।
या किसी का दिल दुखी हुआ हो, तो मैं (एड.अमित कुमार जैन) चन्देरी आप सभी करबद्ध होकर क्षमा प्रदान करे ।