

जावरा (अभय सुराणा ) । माँ का रिश्ता जीवन में सबसे पहले होता है, क्योंकि यह जन्म से नौ महीने पहले ही शुरू हो जाता है। माँ जीवन का आधार है। माँ जीवन की धुरी है। उसके बिना सृष्टि अधूरी है। उक्त उद्गार पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती सरिता श्री ने मां एक महातीर्थ विषय पर प्रवचन देते हुए फरमाया कि माँ से बढ़कर न तो कोई मजहब है न कोई शास्त्र। दुनिया में ईश्वर तुल्य अगर कोई है तो माँ-बाप हैं। जिस व्यक्ति के दिन का प्रारंभ माता-पिता को प्रणाम करने से और समापन माता-पिता के चरणों की सेवा से होता है, वह दुनिया का सबसे सौभाग्यशाली व्यक्ति बन जाता है। दुनिया में तीर्थंकर हो या पैगम्बर, अवतार हो या सिकंदर ऐसा कोई नहीं जो माँ के दूध का कर्जदार न हो। माँ ने तीर्थंकरों को जन्मा है। माँ का आशीर्वाद ले लिया तो हमारी किस्मत संवर जाएगी और नवग्रह अनुकूल हो जाएँगे। किसी व्यक्ति की भाग्य दशा प्रतिकूल हो तो नौ माह तक श्रद्धापूर्वक अपने माता-पिता को प्रणाम करें। मां जीवन का सुरक्षा कवच है मां शब्द में पूरा ब्रह्मांड समय है जिसके प्यार की कोई सीमा नहीं वह है मदर बाकी सभी रिश्ते हैं अदर, हमारी खुशी से खुश हो और हमारी तकलीफों से दुखी हो वह इस दुनिया में केवल मां ही हो सकती है कहां भी गया है जननी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।महासती प्रियंका श्री जी ने भी अपने उद्बोधन द्वारा बताया कि जैन धर्म में तप को आत्मा की शुद्धि और कर्मों की निर्जरा के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इसे दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है: अभ्यंतर तप और बाह्य तप। तप आत्मा का श्रृंगार है हमारा जीवन नौका के समान है जिसमें तप की पतवार से हम भव भ्रमण को दूर करते हुए मोक्ष मार्ग को प्राप्त कर सकते हैं। 23 तीर्थंकरों के कर्म एक तरफ थे और भगवान महावीर के कर्म एक तरफ तप के माध्यम से उन्होंने अपने कर्मों की निर्जरा करते हुए मोक्ष को प्राप्त किया तप में एकाग्रता और समाधि के माध्यम से आत्मशुद्धि की जाती है और तप में अहंकार, सांसारिक मोह और इच्छाओं का त्याग किया जाता है।तप में कठिन परिस्थितियों को सहन करने की शक्ति विकसित की जाती है।
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष समाज भुषण इंदरमल टुकड़ियां एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि दिनांक 23 अगस्त को लगभग 125 सामूहिक तेले तप के पारणे का आयोजन सागर साधना भवन पर रखा गया है।पारणे के लाभार्थी स्वर्गीय चंदरबाई बाबूलाल जी ओस्तवाल की स्मृति में चित्रा ज्ञानचंद जी ओस्तवाल परिवार रहेंगे एवं 11 लकी ड्रा स्वर्गीय संपतबाई सुजानमलजी मेहता की स्मृति में परिवार द्वारा रखे जाएंगे। श्री जैन दिवाकर बहू मंडल द्वारा नाटिका का मंचन किया गया।धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।