नवकार करे भव पार – महासती सरिता श्री

जावरा ( अभय सुराणा ) । नवकार मंत्र के प्रथम पांच पदों में 35 अक्षर और शेष दो पदों में 33 अक्षर हैं। इस तरह कुल 68 अक्षरों का यह महामंत्र समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला व कल्याणकारी अनादि सिद्ध मंत्र है। इसकी आराधना करने वाला स्वर्ग और मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। उक्त उद्गार पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व के चतुर्थ दिवस नवकार करे भवपार विषय पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती सरिता श्री ने फरमाया कि लौकिक मंत्र आदि सिर्फ लौकिक लाभ पहुंचाते हैं, किंतु लोकोत्तर मंत्र लौकिक और लोकोत्तर दोनों कार्य सिद्ध करते हैं। इसलिए णमोकार मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक लोकोत्तर मंत्र माना जाता है ।
णमोकार-स्मरण से अनेक लोगों के रोग, दरिद्रता, भय, विपत्तियां दूर हो जाती हैं। यह 14 पुर्व का सार है जिनागम का सार है जो व्यक्ति मिथ्यात्व से ग्रसित हो जाता है वह नहीं करने का कार्य भी करने लगता है जिस प्रकार भोजन करने से शरीर में ऊर्जा प्राप्त होती है इस प्रकार णमोकार मंत्र के जपने से आत्मा में ऊर्जा का संचार होता है शुद्ध भाव से जीना गया महामंत्र 19,63,300 शुद्ध आयुष्य में परिवर्तित हो जाता है। पुण्य की प्रकृति 42 है और पाप की प्रकृति 84 है णमोकार मंत्र हमें जीवन की समस्याओं, कठिनाईंयों, चिंताओं, बाधाओं से पार पहुंचाने में सबसे बड़ा आत्म-सहायक है। इसलिए इस मंत्र का नियमित जाप करना बताया गया है। ये पंच परमेष्ठी हैं। इन पवित्र आत्माओं को शुद्ध भावपूर्वक किया गया यह पंच नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है। संसार में सबसे उत्तम मंगल है।महासती प्रियंका श्री जी ने भी अपने उद्बोधन द्वारा बताया कि भाव एक नौका है जिस पर चढ़ कर संसार सागर से पार उतरा जा सकता है। यह धर्म रूप द्वार खौलने की कुंजी है । भाव एक औषधि है जिससे भवरोग की चिकित्सा की जाती है । भाव से रहित आत्मा कितना ही प्रयत्न करे, मुक्ति को प्राप्त नहीं कर सकती।
शास्त्रों में मोक्ष के चार मार्ग बताये गये हैं—दान, शील, तप और भाव इनमें अन्तिम मार्ग भाव है। भाव के अभाव में दान, शील, तप आदि केवल अल्प फलदायक होंगे । दान के साथ दान देने की शुद्ध भावना होगी, शील पालने की सच्ची भावना होगी और तप करने के सुन्दर भाव होंगे तभी वे मुक्ति के हेतु बनेंगे। मन की भावना उत्थान और पतन दोनों कर सकती हैं भावों की शुद्धता से ही मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं।
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकड़ियां एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि दिनांक 23 अगस्त को लगभग 131 सामूहिक तेले तप के पारणे का आयोजन सागर साधना भवन पर हुए पारणे के लाभार्थी स्वर्गीय चंदरबाई बाबूलाल जी ओस्तवाल की स्मृति में चित्रा ज्ञानचंद ओस्तवाल परिवार रहें। श्री जैन दिवाकर महिला मंडल एवं महावीर डांगी द्वारा स्तवन की प्रस्तुति दी।धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।

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