
जावरा (अभय सुराणा) । जैन आगमों के अनुसार घर को ‘प्यार का सागर’ बनाने के लिए, परिवार के सदस्यों को प्रेम, आदर और सामंजस्य से रहना चाहिए। झगड़े और मनमुटाव से घर का माहौल खराब होता है, जबकि एक दूसरे को समझना और सहयोग करना घर को आनंद का स्थान बनाता है।घर एक आनंद और उत्सव का स्थान होना चाहिए, न कि दुख और कलह का। परिवार के सदस्यों को एक दूसरे के साथ प्रेम से रहना चाहिए। घर में शांति और खुशी का माहौल होना चाहिए, जहां सदस्य एक दूसरे से आदर और सम्मान से बात करें। परिवार में देवरानी-जेठानी या सास-बहू जैसे रिश्तों में प्रेम और सामंजस्य बनाए रखना महत्वपूर्ण है।घर में झगड़े और मनमुटाव से बचें। परिवार के सदस्यों के बीच सम्मान और प्रेम होना चाहिए।परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे की बातों को समझना चाहिए और एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए।घर को हमेशा आनंदमय और उत्सव जैसा बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए, जहां हर सदस्य खुश रहे।उपरोक्त उद्गार पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस धर्मं सभा को संबोधित करते हुआ महासती सरिताश्री जी ने फरमाए धर्मसभा को धर्म सन्देश देते हुए महासती प्रियांकश्री जी ने अन्त्गद सूत्र का वाचन करते हुए फ़रमाया की प्रकृति के घर देर है, अंधेर नहीं” का अर्थ है कि प्रकृति या ईश्वर के यहाँ कोई भी कर्म बिना परिणाम के नहीं रहता। अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का फल बुरा होता है, भले ही उसमें थोड़ा समय लग जाए। यह जैन दर्शन के कर्म सिद्धांत से मेल खाता है, जिसके अनुसार प्रत्येक आत्मा अपने कर्मों के अनुसार फल पाती है और कर्मफल का नियम अटल है, बस उसके समय में अंतर हो सकता है। प्रकृति कर्म के सिद्धांत को दर्शाती है, जिसमें अच्छे कर्मों का सकारात्मक परिणाम और बुरे कर्मों का नकारात्मक परिणाम अवश्य मिलता है। कर्म फल मिलने में देर हो सकती है, लेकिन यह अंधेर नहीं होती। हर कर्म का लेखा-जोखा होता है और उचित समय पर उसका फल प्राप्त होता है।कर्म सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण है। आत्मा अपने किए हुए कर्मों से बंधी होती है और कर्मों के प्रभाव से सुख-दुःख का अनुभव करती है।सही समय आने पर उसका फल अवश्य मिलेगा। प्रकृति का नियम निष्पक्ष होता है और किसी के साथ अन्याय नहीं होता।उपरोक्त जानकारी श्रीसंघ अध्यक्ष इन्दरमल टुकडिया एवं वरिष्ट उपाध्यक्ष ओम प्रकाश श्रीमाल ने बताया की विविध धर्म आराधना के साथ पर्युषण पर्व गतिमान है आज पचम दिवस महावीर जन्म वाचन किया गया । इस पावन अवसर पर जैन दिवाकर बालिका मंडल द्वारा भगवान महावीर के सिद्धांत पर आधारित सुन्दर नाटिका का मंचन किया। जिसमे मंडल की महिमा तातेड आयुषी छाजेड़ ख़ुशी कोचट्टा धृति चत्तर प्रियांशी चत्तर हिरिशा छाजेड़ अवयांशी ओस्तवाल हर्षित चत्तर जीनत ओस्तवाल अविशी जैन रेवंशी मेहता आर्वी जैन हर्षित चत्तर हर्षी श्रीश्रीमाल भाविक चापरोद अर्नव लुनिया अथर्व श्रीश्रीमाल प्रियंक मेहता अरहम भंडारी आराध्य भण्डारी ग्रन्थ कोचट्टा जहान्वी राका आद्या ओस्तवाल हर्षी संघवी बाल कलाकारों ने प्रस्तुति दी । प्रवचन की प्रभावना का लाभ डाडमचंद सुरेशचंद धारीवाल एवं राकेश अर्पल अव्यान कोचट्टा ने लीया धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।