



रतलाम । समवत्सरी महापर्व के दिन दक्षिण चंद्रिका डॉ संयमलता म.सा. ने फरमाया की मिच्छिम दुक्कड़म की आवाज केवल होंठो या अधरों से नही दिल से निकलनी चाहिए। गुस्सा अगर सोमवार को आए तो सोचो कि आज तो सप्ताह का पहला दिन है आज क्या गुस्सा करना, मंगलवार को आए तो सोचो मंगल में क्यों दंगल करना, बुधवार तो शुद्ध तो शुद्ध में गुस्से की मिलावट क्यों करना, गुरुवार तो गुरु का वार गुरू के वार में गुस्सा कैसे कर सकते है, शुक्रवार तो सबका शुक्रिया करने का दिन है तो शुकराना के दिन क्या गुस्सा करना, शनिवार को गुस्सा करेंगे तो शनिदेव नाराज हो जाएंगे और यदि रविवार को गुस्सा आ जाए तो सोचो आज तो छुट्टी का दिन है छुट्टी के दिन तो गुस्से की भी छुट्टी रखना है। इस प्रकार यदि सोच लोगे तो किसी भी दिन आपको गुस्सा नही आएगा।
जैसे मार्च एंडिंग में व्यवसाय की लाभ हानि का हिसाब किताब करते है, वैसे ही समवत्सरी आत्मा के लिए मार्च एंडिंग के समान है। प्रेम सबसे करो विश्वास कुछ पर करो और वैर किसी से मत रखो। चांद के दरबार में सितारे नही खिलेंगे तो कँहा खिलेंगे, समुद्र के किनारे नही मिलेंगे तो कँहा मिलेंगे, धर्म के नाम पर राग द्वेष रखने वालों समवत्सरी के दिन भी तुम्हारे दिल नही मिलेंगे तो कब मिलेंगे । क्रिया कितनी भी उत्कृष्ट हो लेकिन अगर मन में कषाय है तो क्रिया निष्फल है।
समवत्सरी प्रतिकमण के पूर्व महासतीया जी ने समस्त सती मण्डल की और से श्रीसंघ के प्रत्येक सदस्य से जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमायाचना की। इस अवसर पर श्रीसंघ अध्यक्ष अजय खमेसरा ने समस्त श्रीसंघ से एवं सती मण्डल से क्षमायाचना करते हुए सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। संघ के वरिष्ठ सलाहकार महेंद्र बोथरा, महामंत्री विनोद कटारिया, कोषाध्यक्ष अमृत कटारिया, युवा मंडल महामंत्री आशीष कटारिया ने भी अपने भाव व्यक्त किये । इस अवसर पर लगभग 50 अठाई एवं अठाई से अधिक की तपस्या करने वाले तपस्वीयों का बहुमान श्रीसंघ की और से किया गया। धार्मिक नाटिका के अंतर्गत जम्बू कुमार की नाटिका का मंचन किया गया जिसमें यह बताया गया कि राजकुमार जम्बू को जब वैराग्य आता है तो वे किस प्रकार अपनी आठों रानियों को अपने माता पिता सास ससुर और साथ ही 500 चोरों को प्रतिबोध देते है और उन्हें भी अपने साथ संयम के मार्ग पर प्रशस्त करते है। एक अद्भुत नजारा धर्मसभा में इस नाटिका के माध्यम से उत्तपन्न हुआ। स्नेहा भण्डारी, प्रियल बोहरा, आँचल गाँधी, गरिमा बाफना, आशवी जैन, डविशा पटवा, यशी कटारिया, भूमि गाँधी, सुहानी पटवा, रक्षिता पटवा, दिशा गाँधी, अविशा गाँधी, आराध्या बोथरा, याशिका कटारिया, ऋतु बाफना, भवि गांधी, अवि बाफना, जिया कटारिया, कविशा कटारिया ने नाटिका में भाग लिया।