श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान की आठवीं वर्ष गाँठ में गंगवाल परिवार ने किया श्री विद्यमान बीस तीर्थकर विधान का आयोजन

जावरा( म.प्र.): संयम की साधना सिद्ध की आराधना और निजात्मा की प्रभावना हेतु श्री सिद्ध चक्र मंडल विधान की वर्ष गाँठ का आयोजन लगातार पिछले 7 वर्षों से किया जा रहा है।इसके मुख्य लाभार्थी श्रीमति पदमा-पुष्पेंद्र-प्रवेश गंगवाल है।जिनके द्वारा यह आयोजन किया जाता जा रहा है। इस विधान के अंतर्गत प्रतिदिन अभिषेक नित्य नियम विधान एवं प्रवचन जिनेंद्र भक्ति आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस अवसर पर जयपुर नगर से पधारी विदुषी समय जैन ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आज के भौतिक चकाचोध के युग में मानव का झुकाव पश्चिमी सभ्यता की ओर बढ़ रहा है ऐसे समय में हम अपनी धार्मिक विरासत को निरंतर गतिमान करते रहे तथा आज के युवा एवं युवतियां को भी ज्यादा से ज्यादा इसमें जोड़ने का प्रयास करें।बहुत ही सरल शब्दों में धर्म की व्याख्या को आपके द्वारा समझाया जा रहा है इसके साथ ही दूसरी विदुषी लिपि जैन जो महरौनी उत्तर प्रदेश से आई है।वो भी जिनवाणी के महत्व को प्रतिपादित कर रही है तथा विद्यमान बीस तीर्थकर महामंडल विधान के महत्व को बता रही है तथा इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया गया है कि हम हर वर्ष अपनी जन्म दिनांक को,शादी की वर्षगांठ हो,या परिवार में किसी भी सदस्य को जन्मदिन में बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।पर भाग्यशाली तो वे होते हैं जो श्रावक श्राविकाएं निरंतर इस तरह के धार्मिक आयोजन करते रहते हैं।जो समाज को जिन धर्म के महत्व को इस मंडल विधान के माध्यम से जोड़ने का काम कर रहे है,और समाज को ऐसे कार्य को करने की प्रेरणा दे रहे है।रात्रि में श्री चंद्र प्रभु महिला मंडल चौपाटी द्वारा जिनेंद्र भक्ति का भी आनंद भी सभी को मिल रहा है।जिसमें जम्बू कुमार गंगवाल,विमल कुमार दिलीप मदावत,डॉ.राकेश जैन,सी.पी.जैन,राजकुमार गोधा,अतुल कुमार जैन,पदम पापड़ी वाल आदि कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इस आयोजन में जयपुर,बांसवाड़ा,अजमेर इंदौर, रतलाम, मंदसौर आदि अनेक शहरों से श्रावक-श्राविकाएं आकर धर्म आराधना कर रहे हैं। कार्यक्रम का सम्पूर्ण निर्देशन पंडित अंकुर जैन द्वारा किया जा रहा है।