रतलाम का ऐतिहासिक चातुर्मास समापन के पश्चात जैन दिवाकरीय डॉ संयमलता म.सा. आदि ठाना को श्रीसंघ ने दी नम आँखों से विदाई

रतलाम 6 नवम्बर। श्रमणसंघीय आचार्य डॉ शिवमुनी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी, गुरुणी पूज्या कमलावती जी म.सा. की शिष्या, दक्षिण चंद्रिका महासती डॉ संयमलताजी, साध्वी डॉ अमितप्रज्ञा जी, साध्वी डॉ कमलप्रज्ञा जी, साध्वी सौरभ प्रज्ञा जी आदि ठाना 4 का श्री वर्धमान स्थानक वासी जैन श्रावक संघ नीमचौक मे आराधनमय वर्षावास संपन्न कर आज प्रातः जैन स्थानक से विदाई विहार रखा गया जो शहर के विभिन्न मार्गो से होता हुआ श्रीसंघ अध्यक्ष अजय खिमेसरा के निवास स्थान पर जाकर प्रजापति धर्मशाला मे मंगल अनुष्ठान के रूप मे संपन्न हुआ।
विदाइ समारोह के मंगल अनुष्ठान  की कलश स्थापना इस समारोह के लाभार्थी मिट्ठूलाल अजय कुमार, आयुष कुमार खीमेसरा परिवार ने की, इस अवसर पर डॉ कमलप्रज्ञा जी म सा और साध्वी सौरभ प्रज्ञा जी ने स्तवन के माध्यम से ,”रतलाम वालो को ना भूलेंगे हम”  विदाई गीत गया । गीतिका के दौरान श्रावक श्राविकाओं की आंखे नम हो गई । इसी के साथ साथ डॉ अमितप्रज्ञा म सा ने “मत रोको हमको बहुत दूर जाना” की गीतिका प्रस्तूत की जिससे सदन मे सभी की आँखों से अश्रु निकलने लगे।
श्रीसंघ मिडिया प्रभारी नीलेश बाफना ने बताया की प्रातः जैन स्थानक से  विदाई विहार प्रारम्भ हुआ तो बालिका मंडल, बहु मंडल, महिला मंडल, श्री संघ, बालक मंडल के साथियो ने नम आँखों से पूज्य सतिया मंडल को विदाई देते पुनः शीघ्र चातुर्मास रतलाम करने की विनती की। इस चातुर्मास की मुख्य उपलब्धिया सात मासखामण, पांच सिद्धि तप, पांच सजोड़े आजीवन शिलव्रत प्रत्यखान, 105 अठाई, 800 तेले, हर रविवार पाठशाला जिसमे 200 बच्चे की उपस्थिति, 400 श्रावक श्रविकाओं द्वारा शुक्रवार एकासन, कई  श्रावक श्रविकाओं ने ज्ञान ध्यान, स्वाध्याय, सामायिक प्रतिकामण कंठस्य किए, कई श्रावक श्रविकाओं ने 120 दिन मे 500 सामायिक, 300 सामायिक, 100 सामायिक किए,और विशेष उपलब्धि यह रही कई हमने जितना माँगा उससे सवाया देना हुआ, इसके साथ साथ करोड़ो से भी अधिक बार अरिहंत और सिद्ध प्रभु के मन्त्र का उच्चारण इस चातुर्मास काल के दौरान हुआ।
समारोह को सम्बोधित करते हुए जैन दिवाकरीय महासध्वी डॉ संयमलता जी म सा ने कहा की किसने कहा विदाई है किसने कहा जुदाई है, यह तो परमात्मा महावीर का आदेश है जहाँ चार माह तक साधु साध्वी आते है उनहे वापस जाना है, मगर रिश्ते नाते नही छुटते है यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। यह नीमचोक श्रीसंघ एक वट वृक्ष की तरह है यहां छाया लेने साधु साध्वी आते जाते रहते है ओर यहां के श्रावक फुल के समान है जिनकी सुगंध से हम लोग आते जाते रहेंगे ।
समारोह को संघ गौरव महेंद्र बोथरा ने सम्बोधित करते कहा की जैन दिवाकर  संघ एक ऐसा संघ है जो कहता है वो करता है, श्रीसंघ अध्यक्ष अजय खिमेसरा ओर महामंत्री विनोद कटारिया दोनो ने जब से भार संभाला तभी से इस वर्षावस को सफल बनाने मे पूरी मेहनत की और एक बेहतरीन टीम तैयार की जो इस सफल चातुर्मास का आधार है। साथ ही पूज्य महासतिया जी म सा की संयम त्याग साधना की वजह से यह चातुर्मास ऐतिहासिक हुआ, महासतिया जी ने इतनी सरलता ओर आत्मीयता ने संघ को जोड़ा है, अपने जो साधना ओर मंगल पथ की वजह से लोगो के काम हुए, यह आपकी तप साधना ओर मांगलिक का परिणाम है।
कार्यक्रम मे तनीषा, आयुषी, आयुष, सीमा खिमेसरा ने भी अपने भाव व्यक्त किए। श्रीसंघ अध्यक्ष अजय खिमेसरा ने कहा की संयमलता जी की सिद्धि, अमितप्रज्ञा जी की ज्योतिषी , कमल प्रज्ञा जी का मधुर गान, सौरभ प्रज्ञा जी की जोशीला तान ने इस चातुर्मास को ऐतिहासिक सफल बनाया । आपकी उचित दिशा निर्देशन मे पूरे चातुर्मास मे सभी कार्यक्रमों श्रावक श्रविकाओं ने उत्साह पूर्वक भाग लिया । इस ऐतिहासिक सफल चातुर्मास के लिए मे पुरे श्री संघ का आभार मानता हूँ। कार्यक्रम के दौरान खमेसरा परिवार परिवार द्वारा आदर की चादर पूज्य महासतिया मसा को भेंट की गई ।  कार्यक्रम का संचालन विनोद बाफना ने किया।