महापुरुषों की जयंती मनाने से ना केवल हमारे कर्मों की निर्जरा होती है बल्कि हमारे रूके हुए काम भी हो जाते हैं- डॉ. संयमलताजी

जावरा (अभय सुराणा) । श्रमण संघ की गौरव एवं जावरा की माटी की आन बान एवं शान दक्षिण चन्द्रीका प्रखर वक्ता विदुषी महासती डॉ संयमलताजी मा. सा.ने आज जावरा में पुज्य उपाध्याय श्री कस्तुरमुनि पावनधाम सेजावता जावरा में एक महंती धर्मसभा को संबोधित करते हुए जगतवल्लभ जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज की 148 वीं जन्मजयंती व जावरा की माटी के लाल श्रमण संघीय उपाध्याय ज्योतिषाचार्य पंडित रत्न श्री कस्तुरमुनि जी महाराज की 120 वीं दिक्षा जयन्ती पर उनको नमन करते हुए कहा कि हम पुण्य शाली है कि मध्यप्रदेश के मालवा की पावन धरा पर जन्म लेकर दो महापुरुषों ने ना केवल अपने जीवन को सार्थक बनाया बल्कि हमें भी जीवन जीने की कला से परिचित कराया।
ऐसे इतिहास महापुरुष श्रमण संघ के महानायक जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज जिनका जन्म मालवा की नीमच नगरी में हुआ वहीं दुसरे महापुरुष श्रमण संघ के गौरव उपाध्याय श्री कस्तुरमुनि जी महाराज का जन्म मालवा क्षेत्र की जावरा नगरी में हुआ जीनकी पावन स्मृति में 10 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना का निर्माण कार्य आप देख रहे हैं। इन दोनों महापुरुषों को धार्मिक संस्कार इनके माता-पिता से मिले जिसकी वजह से आज हमारे श्रमण संघ का व हमारा श्री जैन दिवाकर सम्प्रदाय का नाम पुरे भारत के जैन समाज में गर्व के साथ लिया जाता है महासती डॉ संयमलताजी जी ने कहा कि मालवा के जिन महापुरुषों की वजह से हमारा गौरव बढ़ा है किन्तु उनके गौरव के ठीक विपरित आज हमारे जावरा श्री संघ की स्थिति है। संगठन में ही शक्ति है सब मिल बैठकर संगठन हीत में सोचेंगे कार्य करेंगे तो ही महापुरुषों की जयंती मनाना सार्थक होगा।
इस अवसर पर रतलाम श्री संध के महेंद्र बोथरा ने भी संगठन की मजबूती पर जोर दिया। श्रीमती दीपिका रांका ने स्तवन प्रस्तुत किया। वहीं महासती डॉ अमित प्रज्ञा जी, डॉ कमल प्रज्ञा जी व श्री सौरभ प्रज्ञा जी ने जैन दिवाकर की जीवनी पर आधारित एक हृदय स्पर्शी मारवाड़ी भाषा में गीत की प्रस्तुति दी जिससे पुरी धर्मसभा में हर्ष हर्ष जय जय की ध्वनि से गूंज उठा।
पुज्य कस्तुरमुनि पावनधाम निर्माण ट्रस्ट द्वारा आयोजित महापुरुषों की धर्मसभा में सबसे पहले अनुष्ठान क्लश की स्थापना पुज्य उपाध्याय श्री कस्तुरमुनि पावनधाम ट्रस्ट के सभी टस्टीयो द्रारा की गई। स्वागत उद्बबोधन ट्रस्ट के महासचिव सुजानमल कोचट्टा ने देते हुए कहा कि जावरा की माटी में जन्मी विदूषी महासती प्रखर वक्ता डॉ संयमलताजी न केवल दक्षिण भारत की चन्द्रीका है बल्कि मैं यह कहुंगा कि महासती जी वाणी रत्ना होकर पुरे श्रमण संघ की चन्द्रीका है जिनकी भाषा शैली व मधुर वाणी में वह जादू है कि आपके प्रवचन सुनकर ही धर्मसभा में आनन्द उत्साह व शान्ति की लहर दौड़ जाती है।
धर्मसभा को समाजसेवी चन्द्र प्रकाश ओस्तवाल ने भी सम्बोधित किया। अंत में श्री कस्तुरमुनि पावनधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष राकेश मेहता ने चल रहे पावनधाम निर्माण कि विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पावनधाम निर्माण के शिल्पकार प्रेरणा पुंज आगम मार्तण्ड दक्षिण भूषण श्रमण संघीय उपाध्याय डॉ गोतममुनि जी महाराज के सानिध्य में निर्माणाधीन महत्वाकांक्षी योजना में चिकित्सा सेवा भवन, प्रवचन हाल, गुरु भगवन्तो की छतरी साधु संत सतियो के उपाश्रय के साथ 20 से भी अधिक अतिथि कक्षो के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना है जिसमें आप उदारमना भामाशाह दान दाताओं से भरपुर सहयोग की अपील है। आभार कोषाध्यक्ष पारसमल गादिया ने माना अंत में महासतीया जी की महामांगलिक व गोतम प्रसादी के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। उक्त जानकारी श्री संघ के पुर्व मंत्री सुभाष टुकडीया ने दी।