रतलाम । आजादी के बीज विदेश से आयात नहीं होते यह स्वदेशी मिट्टी में तैयार किए हुए वह पौधे होते हैं जो अपने जन्म से लेकर ही आजादी के सपने देखना आरंभ कर देते है उम्र के साथ-साथ देशभक्ति वीरता और साहस से परिपूर्ण ऐसे भारत माता के सपूतों को तैयार करें जो उसे कभी गुलामी की बेडिय़ों में जकड़ न पाए चंद्रशेखर आजाद एक ऐसे ही धूमकेतु नक्षत्र थे । जिन्होंने भारतीय क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया उन्हें एक दिशा प्रदान की वीर भगत सिंह अशफ़ाकउल्लाह सुखदेव और राजगुरु जैसे महान क्रांतिकारियों के वे मार्गदर्शक रहे उन्हें अंग्रेज हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का शंखनाद करने के लिए प्रेरित किया मात्र 25 वर्ष की आयु में क्रांति का सपना देखने वाले आजाद को यह संस्कार प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा से ही मिल गए थे । भाबरा जिला अलीराजपुर मध्य प्रदेश मैं अपनी शिक्षा दीक्षा ग्रहण कर आजाद ने काशी के लिए पलायन कर लिया जाने का मकसद संस्कृत अध्ययन था लेकिन उनके दिल में तो मशाल जल उठी थी आजादी की अंग्रेजी अत्याचारों और दमनकारी नीतियों के विरुद्ध उन्होंने लडऩे का संकल्प धारण कर लिया और अपनी योजनाओं में भारत को किसी न किसी रूप में आजाद होते देखना ही अपना उद्देश्य बना लिया । वे अपने नाम के साथ आजाद लिखते थे यह उनकी प्रखर देशभक्ति विचारधारा का प्रमाण था वह गुलाम बनकर जीवित नहीं रहना चाहते थे इसी कारण उन्होंने अपने प्राण स्वयं ले लिए उनके प्राणों का बलिदान उनके आजाद रहने की प्रबल इच्छा शक्ति का प्रमाण था जो इतिहास में कहीं नहीं मिलता है वे आजा थे आजाद है और हमेशा साथ रहेंगे आजादी के इस दीवाने को शत शत नमन।
उक्त विचार शहीद चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर शिक्षक सांस्कृतिक संगठन द्वारा आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा में प्रखर शिक्षाविद वक्ता डॉक्टर मुरलीधर चांदनी वाला ने व्यक्त किए । आपने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणादाई रहेगा इतनी छोटी उम्र में इतने बड़े सपने देखने वाले यह महान क्रांतिकारी सचमुच भारत माता को भाग्य से मिले थे धन्य है भारत भूमि जहां ऐसे वीर सपूतों ने जन्म लेकर हमें पूरे विश्व में गौरवान्वित किया ।
समग्र शिक्षक संघ के ऊर्जावान शिक्षक कवि कमल सिंह सोलंकी ने प्रसिद्ध कवि श्रीकृष्ण सरल की पंक्तियों के साथ शहीद चंद्रशेखर आजाद को नमन करते हुए कहा कि मैं अमर शहीदों का चारण उनके गुण गाया करता हूं कर्ज खाया राष्ट्र ने मैं उसे चुकाया करता हूं ।
विषय प्रवर्तन प्रस्तुत करते हुए संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद के बारे में जितना पढ़ा जाए लिखा जाए उतना कम है उन्होंने अपने छोटे से जीवन में क्रांति का एक नया इतिहास लिखा था वीरता और साहस की प्रतिमूर्ति चंद्रशेखर आजाद स्वदेशी से परिपूर्ण थे उनका रहन-सहन सदैव भारतीय होने का गौरव दिलाता है वे अपने साथियों में काफी लोकप्रिय और चतुर माने जाते थे बुद्धिमता पूर्ण निर्णय लेने मे वे अग्रणी से अंग्रेज हुकूमत की आंखों की किरकिरी आजाद सदैव आजाद रहे।
आजाद भारत माता के ऐसे वीर नायक थे जिनका स्मरण मात्र कर देता उनका संपूर्ण व्यक्तित्व भारत माता के प्रति जीने मरने की प्रेरणा जगा देता है देशवासियों को सदैव उनके विचारों का और उनके बलिदान का ऋणी रहना चाहिए।
लायंस क्लब की झोन चेयर पर्सन वीणा छाजेड़ ने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति सदैव अत्याचार और दमनकारी व्यवस्था का विरोध करने की प्रेरणा देती है और चंद्रशेखर आजाद की गतिविधियां ऐसी ही शिक्षा पद्धति का परिणाम है उनमें यह संस्कार स्कूल कालखंड से ही विकसित हो गए थे जो आगे चलकर उन्हें महान क्रांतिकारी बना गए।
चंद्रकांत वाफगांवकर ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का नाम लेते ही मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है देशभक्ति की भावना हमारे मन में उत्तेजना पैदा करती है भारतीय होने का गर्व महसूस कराती है आजाद जैसे युवाओं क्रांतिकारियों ने भारत माता का सर गर्व से ऊंचा कर दिया था।
पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम तोगड़े ने कहा कि आजाद उनके नाम से ही आजाद थे और हमेशा रहेंगे मध्य प्रदेश के भाबरा जैसे छोटे इलाके में आदिवासियों के बीच पले बढ़े ऐसे महान क्रांतिकारी को भारत माता और प्रत्येक भारतवासी को गर्व होना चाहिए क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेज हुकूमत के दांत खट्टे कर दिए थे।
भारती उपाध्याय ने कहा कि वीरता और साहस चंद्रशेखर आजाद में अपने स्कूली जीवन से ही विकसित हो गए थे 15 कोड़े मारने की जो सजा होने दी थी वह अंग्रेज सरकार की हुकूमत हिला गई।
दशरथ जोशी ने कहा कि आजाद जैसा क्रांतिकारी कई सदियों के बाद जन्म लेता है हम बड़े सौभाग्यशाली हैं कि हमें आजाद जैसा क्रांतिकारी देशभक्त भारत माता का सच्चा सपूत मिला जिनके बलिदान से आज हम आजाद जीवन जी रहे है । संस्था सचिव दिलीप वर्मा ने कहा कि आजाद ने छोटी सी आयु में पूरी दुनिया को दिखा दिया कि क्रांति कैसे की जाती है कैसे अपने लक्ष्य और उद्देश्यों को पूरा किया जाता है। शिक्षक देवेंद्र वाघेला ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का नाम सुनते ही अंग्रेज सरकार कांपने लगती थी क्रांतिकारियों का नेता होने के कारण उन्हें गर्म जल का व्यक्ति माना जाता था लेकिन वह बेहद बुद्धिमान और चतुर माने जाते थे उनकी योजनाएं सदैव सफल होती थी इसलिए अंग्रेज सरकार उनसे बेहद डरती थी।
रमेश परमार ने कहा कि आजाद हमेशा आजाद रहेंगे उनका संपूर्ण जीवन भारत माता को आजाद दिलाने में व्यतीत हुआ । रमेश उपाध्याय ने कहा कि अंग्रेज सरकार जितना नेहरू और गांधी से नहीं डरती थी उतना अकेले चंद्रशेखर आजाद से डरती थी आजाद क्रांतिकारियों के लिए मसीहा थे उन्होंने अपनी बुद्धिमता से काकोरी कांड को सफल बनाया था ।
शिक्षिका अंजुम खान ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद युवाओं के आदर्श हैं भारत माता को आजादी दिलाने में उनका बलिदान सदैव याद रखा जाएगा आजादी के परवाने को शत-शत नमन । कवि शिक्षक श्याम सुंदर भाटी ने कहा कि आजाद को सदियों तक भुला नहीं जा सकता भारतीय स्वतंत्रता इतिहास में उनका नाम सदैव स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा ।
परिचर्चा में कृष्ण चंद्र ठाकुर, नरेंद्र सिंह राठौर, राजेंद्र सिंह राठौड़. भारतीय त्रिवेदी, कविता सक्सेना, रक्षा के कुमार, मिथिलेश मिश्रा, मदनलाल मेहरा, मनोहर प्रजापति, अनिल जोशी आदि उपस्थित थे । संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार राधेश्याम तोगड़े ने व्यक्त किया ।