बच्चों के संस्कारों हेतु चार पुस्तकों का विमोचन हुआ

चेन्नई न्यू धोबीपेट एसएस जैन संघ 26 नवंबर। महापुरुषों ने अक्षर ज्ञान डिग्री ज्ञान को पूरा ज्ञान नहीं माना हैl बल्कि स्व और पर का भेद करने वाला ही सच्चा ज्ञान होता है l उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने दक्षिण जैन स्वाध्याय संघ के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा की एक लौकिक ज्ञान होता है जो जीवन के चलाने के काम आता है, एक लोकोक्तर होता है जो आत्मा उत्थान के लिए काम आता है l उन्होंने कहा कि संत सूरदास जन्म से अंधे, अक्षर नहीं हुआ, दुनिया नहीं देखा तो भी आत्मा की अनुभूति से आत्म साधना करते हुए परमात्मा पद तक का आनंद लिया l
मुनि कमलेश ने बताया कि इंसान ही नहीं पशुओ को भी आत्मज्ञान की अनुभूति हो जाती है l चंडकौशिक मेंढक आत्मा की अनुभूति करते हुए देवलोक गति को प्राप्त करके मोक्ष के अधिकारी बने l राष्ट्र संत ने कहा कि साधना किसी की ठेकेदारी नहीं है l उसे किसी कर्मकांड की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता l अपना अधिकार जताने वाले सबसे बड़े अज्ञानी और मिथ्यात्वी होते हैं l जैन संत ने कहा कि देहासक्ति त्याग किए बिना आत्म शक्ति का साक्षात्कार नहीं हो सकता ,उसके बिना साधना में प्रवेश भी नहीं कर सकता l
अंत में कहा की आध्यात्मिक शक्ति जागृत करने के लिए परिपूर्ण ज्ञानी की आवश्यकता है l कर्मकांड का ठेका नहीं हैl बिना आत्मज्ञान के की गई उपासना साधना कर्मकांड मुर्दे को श्रृंगार करने के समान है l एक पल का आत्मज्ञान का दान तीन लोक की संपत्ति के दान से बढ़कर है l
दक्षिण स्वाध्याय संघ के अध्यक्ष लाभचंद जी खारीवाल एवं कमला मेहता ने कहा कि सदसाहित्य के माध्यम से सम्यक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है बच्चों के संस्कारों हेतु चार पुस्तकों का विमोचन हुआ। न्यू धोबीपेट संघ के गौतम चंद मेहता ज्ञानचंद संचेती सज्जन चौरड़िया ललित मकाना महिला मंडल आशा दुग्गड़ चंदनबाला पावेचा युवक मंडल सहित सभी ने गुरुओं का अभिनंदन किया।