सिटी–सीडीआरए, आईएलओ प्रोजेक्ट एवं कस्तूरी कॉटन के संयुक्त तत्वावधान में किसान जागरूकता आयोजन सफल



रतलाम, 03 दिसंबर 2025 (बुधवार)। रतलाम जिले के क्लस्टर रावटी के ग्राम नायन में कपास एवं विविध फसलों की खेती करने वाले महिला एवं पुरुष किसानों के लिए सिटी–सीडीआरए, आईएलओ प्रोजेक्ट तथा कस्तूरी कॉटन स्पेशल पायलट प्रोजेक्ट के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य किसान प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता करते हुए नवीन कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और सामाजिक जागरूकता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के जिला अधिकारी श्री रतनेश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में कहा किसान बंधु अपने खेत में जैविक खेती अपनायें, जल सरंक्षण के उपायों को अपनायें ताकि कम से कम जल का दोहान हो, नशा मुक्ति, बिजली बचत, महिला शक्तिकरण, बच्चों की शिक्षा व संस्कार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी, शिक्षा, अनुशासन और नशामुक्ति ग्रामीण समाज की उन्नति के महत्वपूर्ण आधार हैं।
कृषि योजनाएँ एवं तकनीकी मार्गदर्शन
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कृषि विभाग के एसएडीओ श्री जगदीश जी ने कृषि विभाग द्वारा संचालित किसान हितैषी योजनाओं, अनुदान आधारित सुविधाओं तथा फसलों की तकनीकी देखभाल पर प्रकाश डाला।
सिटी–सीडीआरए आईएलओ प्रोजेक्ट के सहायक परियोजना अधिकारी श्री नितिन तोमर ने कृषि कार्य करते समय सुरक्षा उपाय, बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, जातिगत भेदभाव समाप्त करने तथा महिला एवं पुरुष के लिए समान मजदूरी जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी दी।
कस्तूरी कॉटन—रतलाम की विशेष पहचान
सिटी–सीडीआरए स्पेशल कपास पायलट प्रोजेक्ट रतलाम के परियोजना अधिकारी श्री राकेश पाटीदार ने बताया कि रतलाम की लंबे रेशे वाली कपास को भारत सरकार द्वारा कस्तूरी कॉटन नाम देकर राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दी गई है, “अब भारत में तैयार होने वाला कपड़ा विश्वभर में कस्तूरी ब्रांड के नाम से पहचाना जाएगा, जो जिले के लिए गर्व की बात है।” साथ ही सघन खेती प्रणाली उत्तम बीटी हाइब्रिड कपास बीजडी–टॉपिंग तकनीकड्रिप सिंचाईमाइक्रोन्यूट्रिएंट का उपयोग तकनीकों का विस्तृत मार्गदर्शन दिया ।
जन अभियान परिषद के विकासखण्ड समन्वयक श्री निर्मल अमलियार ने कहा कि किसान समूहों के रूप में संगठित होकर बड़े पैमाने पर खेती करेंगे तो उत्पादन और लाभ दोनों में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
कृषि विभाग रावटी के श्री प्रकाश झोडिया ने बताया कि एटीएमए योजनांतर्गत जैविक समूह बनाकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों को बाजार में उच्च मूल्य प्राप्त होगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
वागधारा संस्था की श्रीमति रेणुका पोरवाल ने पारंपरिक कृषि पद्धतियों, मोटे अनाज की खेती तथा जल–जंगल–जमीन संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। सिटी–सीडीआरए कपास परियोजना के प्रतिनिधि श्री बेनर सिंह मचार ने बताया कि वर्ष 2023 से परियोजना के प्रभाव से प्रति हेक्टेयर कपास उत्पादन में 2–3 क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई है। किसान कपास के साथ मक्का, मूंगफली, उड़द, अरहर, मूंग, मिर्च, भिंडी आदि फसलों की मिश्रित खेती अपनाकर अधिक लाभ कमा रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन श्री गजेन्द्र सिंह चौहान एवं श्री देवलाल खड़ाड़ी द्वारा किया गया। प्रमुख उपस्थितजनों में— कन्हैयालाल भाभर, रमेश निनामा, राजेंद्र डामर, राकेश अमलियार, रमेश खड़ाड़ी, कृषि सखी काली डोडियार, ज्योति गोयल सहित बड़ी संख्या में किसान भाई–बहन उपस्थित रहे।