“सुखी और शक्तिमान समाज के लिए आत्मनिरीक्षण आवश्यक” – वल्लभ भंसाली

रतलाम। यदि हमारे आसपास सड़कें टूटी हैं, नालियां बह रही हैं या ऐसे पुल टूट रहे हैं जिन्हें नहीं टूटना चाहिए—तो क्या इसके लिए केवल व्यवस्था जिम्मेदार है, या हम स्वयं भी? इसी मूल प्रश्न से शुरू हुई यह चर्चा एक व्यापक सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक विमर्श में परिवर्तित हो गई।
वरिष्ठ विचारक एवं सामाजिक चिंतक सत्य विज्ञान फाउंडेशन एवं देश अपनाए फाउंडेशन के वल्लभ भंसाली ने कहा कि हम एक अच्छे समाज और अच्छे देश की कल्पना तो करते हैं, लेकिन उसके निर्माण की जिम्मेदारी किसी मसीहा, किसी नेता या किसी चुनाव परिणाम पर छोड़ देते हैं। हम शिकायत करते हैं, पर स्वयं शुरुआत नहीं करते। उन्होंने कहा कि हर वर्ष न्यू ईयर रिज़ॉल्यूशन बनते हैं, लेकिन अधिकतर असफल हो जाते हैं क्योंकि वे केवल संकल्प होते हैं, क्रियान्वयन नहीं। यही स्थिति देश और समाज को लेकर भी है। सुझाव देने वाले बहुत हैं, लेकिन स्वयं क्या कर रहे हैं—इस पर मौन है।
भंसाली ने नैतिक पतन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि टूटी सड़क और अच्छी सड़क, दोनों पर होने वाला खर्च GDP में समान रूप से गिना जाता है। यही कारण है कि आर्थिक प्रगति के साथ नैतिक प्रगति पर ध्यान नहीं दिया जाता। डिजिटल युग में मनुष्य जाग्रत होकर जीने के बजाय प्रमाद में जीना सीख रहा है। सत्य, मर्यादा और संयम जैसे मूल्य कमजोर होते जा रहे हैं। इसी कारण हमारे ऋषियों ने यम और व्रत की अवधारणा दी, जो मनुष्य की रक्षा करते हैं। जब जीवन से ये हट जाते हैं, तब लालच और भय की कोई सीमा नहीं रहती। इन्हीं अनुभव-सिद्ध और विज्ञानसम्मत विचारों के आधार पर “सुख शक्ति धाम” की परिकल्पना की गई है। यह केंद्र इस शोध पर आधारित है कि सुखी होने के लिए जो चाहिए, वही शक्तिमान बनने के लिए भी आवश्यक है।
इस विचारधारा के समानांतर वल्लभ भंसाली जी लंबे समय से इस बात पर बल देते रहे हैं कि लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका केवल मतदान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसी व्यापक सोच से प्रेरित होकर “देश अपनाए” जैसी पहल सामने आई हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों में अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति सजगता और देश के प्रति आत्मीय उत्तरदायित्व का भाव विकसित करना है। “सुख शक्ति धाम” सभी संप्रदायों के लिए खुला आत्मनिरीक्षण केंद्र है। यहां कर्मकांड नहीं, बल्कि “क्यों” की खोज है। उद्देश्य है कि व्यक्ति अपने स्वयं के अनुभव से सत्य को जाने और उसे जीवन में उतारे।

इस धाम की प्रमुख विशेषताएं हैं—

पूर्णतः निःशुल्क व्यवस्था
कोई शोर, कोई लाउडस्पीकर नहीं
मौन, ध्यान और आत्मनिरीक्षण का वातावरण
परिचय कक्ष, ध्यान कक्ष और स्वभाव-आधारित प्रयोगात्मक संरचनाएं
भारतीय संस्कृति के पांच महापुरुषों—श्रीकृष्ण, भगवान महावीर, गौतम बुद्ध, कबीर दास और गुरु नानक देव—के संदेश

यह केंद्र रतलाम सहित पूरे देश के लिए प्रेरणा बने, इसी उद्देश्य से 4 जनवरी को इसका भव्य उद्घाटन प्रस्तावित है, जिसमें देश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति संभावित है। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि इंफोसिस के संस्थापक श्री नारायण मूर्ति होंगे। विशिष्ट अतिथियों में फोर्स मोटर्स के चेयरमैन एवं अभय प्रभावना म्यूजियम के संस्थापक डॉ. अभय फिरोदिया, टोरेंट एनर्जी के मानद अध्यक्ष सुधीरभाई मेहता, रतलाम के लोकप्रिय विधायक एवं मध्यप्रदेश शासन में कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप तथा सुख शक्ति धाम के द्रष्टा, इनाम सिक्योरिटीज के सह-संस्थापक डॉ. वल्लभ भंसाली उपस्थित रहेंगे।
यह केंद्र केवल देखने की नहीं, बल्कि अनुभव करने की जगह है, जहां व्यक्ति अपने जीवन को अधिक नैतिक, संतुलित और शक्तिमान बना सकता है। इस विचार को समाज तक पहुंचाने में प्रेस एवं मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुख शक्ति धाम के संयोजक मंडल में रतलाम के समाजसेवी मुकेश जैन, गुस्ताद अंकलेसरिया, मेघ कुमार लूनिया, जयंत जैन, संजय व्यास, गौरव त्रिपाठी, वैभव रांका, संजय चपलोत, अजीत छाबड़ा, डॉ. श्याम सुंदर पाटीदार, राजीव श्रीवास्तव, मोहित मुणत एवं विकास शैवाल शामिल हैं।

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