
रतलाम 26 दिसम्बर। श्री हरिशंकर भटनागर के द्वारा रचित कैकेयी का पश्चाताप (खण्ड काव्य) में एक और कैकेयी के सम्बंध में समाज में कई तरह की भ्रांतियाँ एवं धारणा प्रचिलित है। इन धारणाओं का श्री भटनागर ने शोधपरक दृष्टि द्वारा कैकेयी के महत्व को प्रतिपादित किया गया है । दूसरी और अयोध्या में राम और कैकेयी के अपनत्व को विद्वता पूर्वक दर्शाया गया है । श्री भटनागर की दूसरी पुस्तक स्वर्ण रेखा के किनारे से (काव्य संकलन) में स्वाधीनता आंदोलन के एक महत्वपूर्ण तथ्य को तर्क को उदघाटित किया गया है।
यह बात शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.मुरलीधर चांदनीवाला ने साहित्य संस्था अनुभति के स्थापना के स्वर्ण जयंती वर्ष के अन्तर्गत श्री हरिशंकर भटनागर के दोनो पुस्तक के विमोचन समारोह मेडिकल कॉलेज के सामने एक निजी होटल में कहीं ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चिंतक एवं शासकीय महाविद्यालय खाचरौद के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीपसिंह राव ने कहा कि साहित्य संस्था अनुभुति सतत अपने साहित्य में सक्रियता कारण रतलाम जिले में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाना है। श्री भटनागर की दोनों पुस्तकें पौराणिक ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होकर पठनीय है। कार्यक्रम के विशेष अतिथि ठा.रमणसिंह सोलंकी ने कहा कि अनुभूति ऐसी संस्था है जो अपनी गतिविधियों के कारण नए रचनाकारों को नित नवीन अनुभूतियों के दिग्दर्शन कराती है तथा उन्हें रचना लेखन के लिए प्रेरित करती है।
‘स्वर्ण रेखा के किनारेÓ से एवं ‘कैकेयीÓ का पश्चाताप पुस्तकें के लेखक श्री हरिशंकर भटनागर ने कहाकि कैकेयी दुर्वाशा ऋषि की शिष्या होकर युद्धकला एवं शस्त्र विद्या में प्रवीण थी । माता सुलक्षणा एवं पिता अश्वपति के दिए गए संस्कारों का भरपूर उपयोग किया । कैकेयी के द्वारा राम का वनवास नहीं होता तो भारत की भूमि राम का आदर्श व मर्यादा पुरषोत्तम का स्वरूप स्थापित नहीं होता तथा आसुरी शक्तियों का संहार नहीं होता और राम राज्य की स्थापना नहीं होती । जबकि राम और कैकेयी के अंतर सम्बंध इतिहास की दृष्टि से मोटे तौर पर औझल है । इस पुस्तक के प्रकाशन की वास्तविक स्थिति का समुचित प्रभाव पड़ेगा। दुसरी पुस्तक संग्रह स्वर्ण रेखा के किनार से में वीरागंना रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य प्रताप का प्रतीक स्थल है ।
साहित्यिक संस्था अनुभूति अध्यक्ष डॉ. मोहन परमार ने संस्था की ५० की वर्ष की गतिविधियों की संक्षेप में जानकारी देते हुए अतिथियों का परिचय दिया। प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई । इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत अब्दुल सलाम खोकर, डॉ. कैप्टन एम.के. शाह, प्रो. रतन चौहान, रामचन्द्र गेहलोत (अम्बर), श्रीमती इन्दु सिन्हा, अजय शंकर भटनागर, सुभाष यादव, अकरम शैरानी, प्रकाश हेमावत, रणजीतसिंह राठौर, गौरीशंकर खिंची आदि द्वारा किया गया । कार्यक्रम में श्री भटनागर का अखिलेशचन्द्र शर्मा (स्नेही) द्वारा प्रशस्ति पत्रएवं शाल तथा आशीष दशोत्तर, बाबुलाल परमार रावटी, सुभाष शर्मा द्वारा शाल भेंट कर सम्मान किया गया । कार्यक्रम में संस्थापक श्री प्रणयेश जैन एवं संरक्षक दिनेश कुमार जैन मंचासीन थे।
इस अवसर पर डॉ. गीता दुबे, कैलाश वशिष्ट, दिलीप बारोट, संजय परसाई, सिद्दीक रतलामी, लक्ष्मण पाठक, श्रीमती पुष्पलता शर्मा, सुश्री शिवकांता भदौरिया आदि के अलावा कोटा (राजस्थान), रायपुर (छत्तीसगढ़), ग्वालियर, रतलाम जिला, इंदौर, उज्जैन, भोपाल आदि स्थानों के प्रबुद्धवर्ग व्यक्ति उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन व्यंग्य कवि जुझारसिंह भाटी ने किया तथा आभार मुकेश सोनी सार्थक ने माना ।