धर्म का असली प्राण ही प्रेम और सद्भाव है – राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

आबू पर्वत । मोहब्बत और प्रेम से बढ़कर विश्व में कोई धर्म नहीं है धर्म का असली प्राण ही प्रेम और सद्भाव है उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने गुरुद्वारे में संबोधित करते कहा कि सभी धर्म पंथ और संप्रदाय का एक ही लक्ष्य है मानवीय रिश्तो में परस्पर मिठास घुले।
उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म नफरत अपनाने की इजाजत नहीं देता है नफरत अपने आप में अधर्म और पाप है। मुनि कमलेश ने स्पष्ट कहा कि धर्म की ओट में नफरत और फिरका परस्ती फैलाने वाले अपने धर्म और महापुरुष के हत्यारे हैं।
राष्ट्रसंत ने बताया कि मानव मानव से प्यार न करें वह कितनी कठोर साधना कर ले धर्म और परमात्मा को प्राप्त नहीं कर सकता है। जैन संत ने दुख के साथ कहा कि जितना खून खराबा धर्म के नाम पर हुआ उतना हथियारों से भी नहीं हुआ गुरुद्वारे के ग्रंथी ने बताया कि गुरु नानक देव ने सभी संप्रदायों में प्रेम और सद्भाव के फूल खिलाने का संदेश दिया मुनि कमलेश का स्वागत किया गया गौतम मुनि कौशल मुनि अक्षत मुनि ने विचार व्यक्त किए गुरुद्वारे में चेतावनी के रूप में लिखा हुआ है परिसर में शराब गुटका बीड़ी मांस आदि का सेवन वर्जित है राष्ट्रसंत ने सभी धर्म स्थलों के लिए आदर्श रूप में अपनाने का आह्वान किया।