स्वामी जी सनातन संस्कृति और अध्यात्म के चक्रवर्ती सम्राट थे- डॉक्टर चांदनी वाला

शिक्षक मंच ने किया विवेकानंद जयंती का आयोजन

रतलाम।  स्वामी विवेकानंद का जीवन 39 वर्ष की आयु का रहा जिसे हम संपूर्ण युवावस्था कहते हैं इसका अर्थ है कि स्वामी जी युवाओं के प्रतिक के रूप में पूरा जीवन जीए  इतनी अल्पायु में उन्होंने धर्म शास्त्र संस्कृति का गहरा अध्ययन करते हुए सन्यासी जीवन व्यतीत किया अपनी अद्भुत तर्क शक्ति के बल पर वे पूरे विश्व में विख्यात हुए अपने विचारों से उन्होंने संपूर्ण मानव जाति को एक नया संदेश दिया वह वैश्विक आध्यात्मिक चक्रवर्ती सम्राट थे उनके विचारों से युवा प्रभावित होकर क्रांति के मार्ग पर अग्रसर हो सकते थे।
उपरोक्त विचार शिक्षक सांस्कृतिक संगठन द्वारा युवा दिवस 12 जनवरी विवेकानंद जयंती के अवसर पर शासकीय कला  एवं विज्ञान महाविद्यालय स्थित स्वामी जी की मूर्ति पर माल्यार्पण समारोह एवं स्वामी जी के विचारों पर आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ मुरलीधर चांदनी वाला ने व्यक्त किये। आपने कहा कि स्वामी जी का जीवन अत्यंत कठिन दोर से गुजरा था उन्होंने काफी संघर्ष किया शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन का निमंत्रण उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था लेकिन उन्होंने निश्चय कर लिया था कि मैं उस सम्मेलन में अवश्य जाऊंगा और अपने धर्म और सनातन संस्कृति के बारे में पूरे विश्व को अवगत कराऊंगा  उन्हें बड़ी मुश्किल से प्रवेश मिला था और अंतिम वक्ता के रूप में उन्हें आमंत्रित किया था जब उन्होंने बोलना आरंभ किया तब सभा में उपस्थित 2000 प्रतिनिधि मंत्र मुक्त हो गए थे वहां से लौटकर उन्होंने पूरे देश का भ्रमण किया। सनातन सभ्यता और धार्मिक कुरीतियों को दूर करने के लिए समाज को जागृत किया उन्होंने मध्य प्रदेश के छतरपुर में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी इसके साथ ही खंडवा उज्जैन इंदौर आदि स्थान का उन्होंने भ्रमण भी किया था मध्य प्रदेश से उनका गहरा नाता रहा है।
प्राचार्य श्री मिश्रा ने कहा कि स्वामी जी के विचार सर्वकालिक प्रासंगिक रहे हैं युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं उनकी विचारधारा हमारी युवा पीढ़ी को नई दिशा प्रदान कर सकती है स्वामी जी का संपूर्ण जीवन पुस्तक की भांति हमारे समक्ष है जिसका एक-एक शब्द भारतीय संस्कृति का उद्घोष करता है। आपने महाविद्यालय परिसर में स्वामी जी की जयंती मनाने पर शिक्षक सांस्कृतिक मंच का आभार व्यक्त किया मंच अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि स्वामी जी के विचारों और आदर्शों पर चलना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व की बात हो सकती है। उनके व्यक्तित्व में अद्भुत आकर्षण शक्ति वर्तमान समय तक विद्यमान है। उनके चित्र और मूर्तियां हमें हमेशा संजीव लगती है उनके दिए हुए संदेश उठो जागो और तब तक ना रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो यह हमारी आंतरिक चेतना को जागृत करता है उनका स्मरण और नमन हमें आध्यात्मिक प्रेरणा से पल्लवित कर देता है।
श्री गोपाल जोशी ने कहा कि हम आध्यात्मिक संतों की जब बात करेंगे तो सबसे पहले स्वामी जी का नाम हमारे होठों पर आएगा उन्होंने सनातन सभ्यता की जो परिभाषा गड़ी थी वह अद्भुत और सर्वकालिक पूजनीय रही है।
श्री सत्यनारायण सोडा, वीणा छाजेड़, प्रतिभा चांदनी वाला, रविंद्र उपाध्याय, मिथिलेश मिश्रा निलेश शुक्ला श्याम सुंदर भाटी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र ठाकुर, नरेंद्र सिंह राठौड़, दिलीप वर्मा, दशरथ जोशी, कविता सक्सेना, रक्षा के. कुमार, मदन लाल मेहरा, अर्पित मेहरा, देवराज गहलोत आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन दिलीप वर्मा आभार श्याम सुंदर भाटी ने व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *