माँ सरस्वती ज्ञान,गान और ध्यान का समवेत स्वर है – कैलाश व्यास

रतलाम। वसंत पंचमी के पावन पर्व पर शासकीय कन्या महाविद्यालय, रतलाम का वातावरण ज्ञान, संगीत और संस्कारों की सुगंध से आह्लादित हो उठा। महाविद्यालय के नवीन ऑडिटोरियम में विद्या, वाणी और विवेक की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती की मूर्ति का अनावरण प्रखर वक्ता एवं साहित्यकार कैलाश व्यास के मुख्य आतिथ्य तथा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मंगलेश्वरी जोशी की अध्यक्षता में हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि प्रो. वी. के. जैन थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथिगण द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात डॉ. स्नेहा पंडित द्वारा संगीतबद्ध राग वसंत में प्रस्तुत सुमधुर गीत महाविद्यालय की छात्राओ द्वारा प्रस्तुत किया गया ।
मुख्य अतिथि कैलाश व्यास ने अपने उदबोधन में कहा कि “आज का दिन केवल एक पर्व नहीं, अपितु त्रिवेणी का संगम दिवस है ! माँ सरस्वती का प्राकट्य, नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म और महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का अवतरण,
तीनों एक साथ हमें ज्ञान, साहस और सृजन का संदेश देते हैं।” उन्होंने माँ सरस्वती के करकमलों में वीणा, पुस्तक और माला को क्रमशः गान, ज्ञान और ध्यान का प्रतीक बताते हुए छात्राओं से आह्वान किया कि सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़े , परिस्थितियाँ स्वयं अनुकूल होती चली जाएँगी। विशेष अतिथि प्रो. वी. के. जैन ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके साहस, राष्ट्रभक्ति और संकल्प शक्ति को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
इस अवसर पर अतिथिगण द्वारा महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका “ऋचा” का भी विमोचन किया गया, जो छात्राओं की रचनात्मकता और बौद्धिक चेतना का सुंदर प्रतिबिंब है। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. मंगलेश्वरी जोशी, डॉ. माणिक डांगे,डॉ. सुरेश चौहान, डॉ. वी. एस. बामनिया, सहित महाविद्यालय परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का सुसंयोजित संचालन डॉ. बी. वर्षा ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. अनामिका सारस्वत ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनिल जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे। समग्र रूप से यह आयोजन ज्ञान, संस्कृति और स्त्री-शिक्षा के उत्कर्ष का स्मरणीय उत्सव बन गया।

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