रतलाम । न्यायालय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने आरोपीया लालीबाई पति रामाजी भील आयु 65 वर्ष निवासी संदला को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 419 में 3 वर्ष, धारा 467 व धारा 468 में 7- 7 वर्ष व धारा 471 में 2 वर्ष की सजा दी।
प्रकरण में पैरवीकर्ता अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि दिनांक 27.01.2016 को फरियादी राजशेखर पिता घनश्याम निवासी चित्तौड़गढ़ ने थाना दीनदयाल नगर रतलाम पर उपस्थित होकर हाऊसिंग बोर्ड के कार्यपालन यंत्री डी. के. बाथम, सम्पत्ति कर अधिकारी पवन धबाड़े, कर्मचारी नानालाल बामनिया व मनोहरलाल शर्मा, दलाल रमेश शर्मा, पप्पु शर्मा, अशोक दय्या व लालीबाई (फर्जी महिला) एवं अन्य के विरुद्ध FIR करने हेतु लिखित आवेदन इस प्रकार प्रस्तुत किया कि दीनदयाल नगर (अमृत सागर) रतलाम में स्थित म.न. डी-232 वर्ष 1992-93 में मेरी नानी कमला बाई पति मोतीलाल उपाध्याय जाती ब्राम्हण के नाम से हाउसिंग बोर्ड रतलाम से क्रय किया था, वर्ष 2006 में मेरी नानी कमलाबाई उपाध्याय की मृत्यु होने के बाद उस मकान पर मेरी मां रतनबाई पुरोहित का कब्जा था, अशोक दय्या, रमेश शर्मा व हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों ने मिलकर दिनांक 11.04.15 को लालीबाई निवासी मिल्लत नगर (फर्जी महिला व फर्जी पता ) रतलाम के साथ मिलकर लालीबाई ने कमला बाई को उसकी माँ बताकर शपथ पत्र / मृत्यु प्रमाण पत्र पेश कर उक्त मकान धोखाधड़ी कर लालीबाई के नाम करवा लिया। इसके पश्चात् यह मकान दिनांक 10.09.15 को लालीबाई ने कमलेश पिता कैलाश पाटीदार ग्राम मांगरोल को 6 लाख 11 हजार रूपये में विक्रय कर दिया। फरियादी राजशेखर ने आवेदन के साथ मकान के मालिकी संबंधित कागजात भी पुलिस को दिए थे। पुलिस द्वारा राजशेखर के आवेदन पर लालीबाई, हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों, दलाल के विरुद्ध थाना डीडी नगर में FIR दर्ज की गई।
जांच में पाया गया कि कमलाबाई के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र में लालीबाई को उसकी पुत्री बताया गया, मृत्यु प्रमाण पत्र में जो नंबर दर्ज थे उस नंबर पर जमीलउद्दीन पिता कमरुद्दीन निवासी मिल्लत नगर का नाम नगर निगम में दर्ज था। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से फर्जी नामांतरण आवेदन हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में लगाया जिसमें लालीबाई के सभी पते फर्जी लिखे हुए थे। फोटो भी फर्जी लगाया गया था, नामांतरण में लगाया गया वोटर आईडी का मिलान निर्वाचन कार्यालय में कराने पर वह भी फर्जी पाया गया। दस्तावेजों में लालीबाई पति रामजी राठौर (तेली) नाम दर्ज था व सभी पते भी फर्जी थे, नामांतरण में गवाह भी फर्जी थे। फर्जी दस्तावेज से लालीबाई के नाम पर मकान का फर्जी नामांतरण भी हाउसिंग बोर्ड से हो गया। नामांतरण होने के दो माह बाद ही लालीबाई ने मकान कमलेश पाटीदार को बेच दिया, जबकि हाउसिंग बोर्ड के नियमानुसार नामांतरण के एक वर्ष तक मकान का विक्रय नही किया जा सकता है।
पुलिस द्वारा जांच पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय में केस की सुनवाई की दौरान फरियादी राजशेखर व उसकी माता कमलाबाई ने दिनांक 23.07.2024 को न्यायालय में लिखित समझौता लालीबाई के पक्ष में पेस कर दिया था।
न्यायालय ने आरोपीगण दलाल अशोक दय्या, रमेश शर्मा, नानालाल व गोपाल को दोषमुक्त कर दिया। लालीबाई इस प्रकरण में 6 माह जेल में रही थी अभी जमानत पर थी, निर्णय के समय लालीबाई न्यायालय में उपस्थित नही होने पर उसका सजा वारंट जारी हो गया।