जैन श्वेताम्बर सोश्यल ग्रुप, इंदौर स्वस्तिक की कार्यकारिणी द्वारा प्रेम दिवस पर एक विशेष चर्चा का आयोजन

इंदौर। JSSG स्वस्तिक की कार्यकारिणी द्वारा प्रेम दिवस पर एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया, ग्रुप के संस्थापक प्रभात-प्रतिभा जी चोपड़ा द्वारा अपने भाव प्रकट करते हुए वैलेंटाइन डे को सिर्फ एक दिन की अभिव्यक्ति नहीं यह हर दिन का भाव है जो हमारे चहेतों के लिए सदैव बना रहना चाहिए, हर वह इंसान मेरे लिए वैलेंटाइन है जो मेरी परवाह करता है, मेरी सफलता में खुश होता है और हर सुख-दुख में साथ खड़ा रहता है। प्रेम एक दिन के की अभिव्यक्ति नहीं बल्कि हर दिन का भाव है।
ग्रुप के संरक्षक जो हमेशा से ही ग्रुप के चहते रहे हैं जिन्हें ग्रुप में स्नेहपूर्वक ‘लव गुरु’ कहा जाता है पंकज-प्रगति जी बाफना जो अपने वक्तव्य और मंच से सभी को मोह लेते हैं उन्होंने बताया कि यह ग्रुप एक परिवार की भांति है, जहाँ सभी सदस्य एक-दूसरे के सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए समर्पित रहते हैं।आपसी समर्पण और सम्मान ही सच्चा वैलेंटाइन है।
ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष सुभाष-सरोजजी श्रीश्रीमाल जो सदैव ऐसे काम में लगे हुए हैं जो जीवन के साथ और जीवन के बाद भी लोगों की परेशानियां दूर करते हैं वे कहते हैं प्रेम किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं। यदि आप सच में प्रेममय हैं, तो वह आपके हर संबंध में झलकेगा, उन्होंने बताया मैं अपने कार्य के माध्यम से समाज और लोगों की भलाई के लिए समर्पित हूं। ग्रुप का प्रत्येक सदस्य मेरा वैलेंटाइन है, और उनके सुख-दुख में साथ खड़ा रहना मेरी जिम्मेदारी है।
ग्रुप के अध्यक्ष आशीष-नेहा जी पारख , जो ग्रुप में एक आदर्श दंपत्ति के रूप में जाने जाते हैं, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने अध्यक्ष कार्यकाल में वे मानव सेवा, जीव दया एवं धार्मिक कार्यों में सदैव तन-मन-धन से समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा, सच्चा वैलेंटाइन वह है जो हमें आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रेरित करे, हर कदम पर मार्गदर्शन दे और प्रत्येक चुनौती में साथ खड़ा रहे।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दूसरों की सहायता करने में जो आत्मिक सुख प्राप्त होता है, वह कहीं और संभव नहीं है। अपने सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों की सफलता का श्रेय देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी धर्मपत्नी नेहा जी का सतत सहयोग और साथ ही उन्हें इन कार्यों में निरंतर अग्रसर होने की प्रेरणा देता रहा है।
उ पाध्यक्ष पारस-प्रगति जी हरकावत जो कि स्वस्तिक ग्रुप में अपनी एक अलग ही भूमिका में रहते हैं और अपने मार्गदर्शन और व्यावसायिक ज्ञान से ग्रुप को सदैव मार्गदर्शन देते हैं उनके अनुसार प्रेम तब जन्म लेता है जब व्यक्ति भीतर से पूर्ण होता है। प्रेम मांगता नहीं, बांटता है।
उपाध्यक्ष निलेश मीना जी जैन ने प्रेम को समर्पण की संज्ञा देते हुए कहा प्रेम अपेक्षा नहीं, स्वतंत्रता देता है और एक-दूसरे की कमियों को दूर कर नई पहचान बनाने की प्रेरणा देता है।
राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय उपाध्यक्ष अंकित निशा जी चोपड़ा ने कहा प्रेम किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, यह एक ऊर्जा है जो सभी के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है। यही मेरी सच्ची शक्ति और मेरा वैलेंटाइन है।
ग्रुप के कोषाध्यक्ष प्रदीप माधवी जी जैन, जो अपने संतुलित एवं विचारपूर्ण वक्तव्यों से ग्रुप को सदैव अपनी बुद्ध वाणी से मार्गदर्शन देते रहे हैं, कहते है कि प्रेम किसी का मोहताज नहीं होता। सच्चा प्रेम तभी संभव है जब व्यक्ति स्वयं को जान ले और स्वयं को जानने वाला व्यक्ति किसी वैलेंटाइन डे का मोहताज नहीं होता है वह सदैव प्यार से भरा रहता है।
प्रचार सचिव संजय मंजू पोरवाल जो ग्रुप में अपना एक अलग ही स्थान रखते हैं कार्य को शालीनता के साथ करते हैं उनके अनुसार प्रेम बाँधता नहीं, मुक्त करता है। और इसी के भाव के साथ में सदैव काम करता हु।
सचिव ओर मनोनीत अध्यक्ष अभिषेक मेघा मोदी ने कहा जब व्यक्ति भीतर से शांत होता है, तब प्रेम स्वतः बहता है। शांत मन ही सच्चा वैलेंटाइन होता है।
ग्रुप के सचिव अमित अदिती जैन ने अपने विचार रखते हुए कहा “प्रेम एक आदित्य शक्ति है, जो समर्पण सिखाती है। और हम जिसके प्रति समर्पित हैं वही सच्चा वैलेंटाइन है प्यार किसी एक व्यक्ति का मोहताज नहीं होता वह सर्वत्र रहता है माता-पिता, बच्चों, भाई-बहन, मित्र हर वह व्यक्ति जो हमारी परवाह करता है, वही हमारा सच्चा वैलेंटाइन है। सच्चा प्रेम शब्दों में नहीं, त्याग, समर्पण और जिम्मेदारी में दिखाई देता है। प्रेम हमें इतना विशाल बना देता है कि हम स्वयं से ऊपर उठकर परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए जीना सीख जाते हैं।
यह चर्चा का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि वैलेंटाइन डे केवल प्रेमी-युगलों का पर्व नहीं, बल्कि हर उस रिश्तों का उत्सव है जहाँ स्नेह, समर्पण और सम्मान है।