
रतलाम । होलिका दहन एवं धूलेंडी पर्व को लेकर जनमानस में उत्पन्न संशय के समाधान हेतु स्थानीय मानस धाम में ज्योतिषाचार्यों एवं कर्मकांड करने वाले विप्रबंधुओं की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से तिथि, मुहूर्त एवं ग्रहण संबंधी दिशा-निर्देश घोषित किए गए। बैठक में बताया गया कि पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च, सोमवार सायं 5:55 बजे से होगा, जो 3 मार्च, मंगलवार सायं 5:8 बजे तक रहेगी। इस अनुसार
- होलिका दहन 2 मार्च को प्रदोष काल में किया जाना श्रेष्ठ रहेगा। अतः सायं 6:27 से रात्रि 8:56 के मध्य होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है।
- अगले दिन 3 मार्च, मंगलवार को पूर्णिमा तिथि में धूलेण्डी (धूलोत्सव ) मनाया जाएगा।
- 3 मार्च को खग्रास ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण
- 3 मार्च को खग्रास ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण भी रहेगा।
- चंद्रोदय सायं 6:33 बजे होगा।
- ग्रहण समाप्ति 6:47 बजे होगी।
- स्थानीय दृश्य ग्रहण काल 14 मिनट का रहेगा।
- मूल पर्वकाल 3 घंटे 27 मिनट का रहेगा, किंतु ग्रहण का आरंभ चंद्रोदय से ही मान्य होगा।
सूतक काल संबंधी निर्देश
चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल विभिन्न स्थानों पर चंद्रोदय से 12 घंटे पूर्व प्रारंभ आरम्भ जाएगा। अतः प्रातः 6:33 बजे से सूतक प्रभावी रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार सूतक काल में भोजन एवं सांसारिक भोगों का त्याग करना चाहिए। हालांकि बालक, वृद्ध, रोगी, गर्भवती स्त्री एवं अशक्त व्यक्ति आवश्यकता अनुसार ग्रहण आरंभ होने से 5 घंटे पूर्व तक सात्विक आहार ग्रहण कर सकते हैं।
ग्रहण काल में ईष्ट आराधना, जप, ध्यान एवं मंत्र साधना को विशेष पुण्यदायी बताया गया है।
श्री सिद्धविजय पञ्चाङ्ग क़े अनुसार 3 मार्च, मंगलवार को ग्रहण होने के कारण नगर के समस्त देवालयों में प्रातः 6:33 बजे से पूर्व मंगला आरती सम्पन्न कर मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण अवधि के दौरान मंदिरों में नियमित दर्शन एवं पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी। ग्रहण समाप्ति पश्चात सायं 6:47 उपरान्त मंदिरों को पुनः खोला जाएगा। तत्पश्चात मंदिर परिसर की विधिवत स्वच्छता एवं शुद्धिकरण कर भगवान का पूजन-अर्चन एवं आरती सम्पन्न की जाएगी।
होली के उपरांत नगर में पारंपरिक धार्मिक आयोजनों का क्रम इस प्रकार रहेगा — रंग पंचमी का उत्सव 8 मार्च, रविवार को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसी क्रम में 10 मार्च, मंगलवार को श्री शीतला माता का विधिवत पूजन किया जाएगा। तत्पश्चात 13 मार्च, शुक्रवार को दशा माता का पूजन श्रद्धालुओं द्वारा परंपरानुसार संपन्न किया जाएगा।
इस वर्ष 3 मार्च को ग्रहण होने के कारण ग्रामीण अंचलों में श्रद्धालुओं एवं परंपरानुसार शुद्धता-विचार को ध्यान में रखते हुए “चूल” का आयोजन 4 मार्च, बुधवार को किए जाने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में महर्षि संजयशिवशंकर दवे , आचार्य जीवन पाठक , पं. चेतन शर्मा , पं. ओम प्रकाश शर्मा , पं. मुकेश शर्मा , पं. राजेश व्यास , पं. अथर्व शर्मा सहित वैदिक जागृति ज्ञान विज्ञान पीठ, ज्योतिष शिक्षण जनकल्याण समिति, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के जिला पदाधिकारी एवं विभिन्न मंदिरों में सेवा देने वाले विप्रबंधु उपस्थित रहे।