

उदयपुर । “महापुरुषों का जीवन स्वयं एक प्रकाश पुंज होता है,जो पीढ़ियों को सत्य, अहिंसा और सदाचार के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।”
लोक नायक संत जगत् वल्लभ संघ एकता के अग्रदूत प्रसिद्ध वक्ता पंडित रत्न जैन दिवाकर प पूज्य गुरुदेव श्री चौथमल जी महाराज का दिव्य व्यक्तित्व धर्म, साहित्य, समाज-जागरण और मानवीय मूल्यों की उज्ज्वल ज्योति के रूप में युगों-युगों तक स्मरणीय रहेगा। अहिंसा, शाकाहार, व्यसनमुक्ति, जैन दर्शन, संघ एकता, स्वधर्मी सहायता तथा साहित्य के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए युगान्तकारी कार्यों ने समाज को नई दिशा, नई चेतना और नई प्रेरणा प्रदान की है।
ऐसे महामहिम संत के साक्षात् दर्शन,पावन सान्निध्य एवं अमृतमय प्रवचनों से प्रेरित होकर जिन्होंने अपने जीवन को धर्म,सदाचार और समाजसेवा के पथ पर समर्पित किया तथा अपने कर्म और आचरण से समाज में नैतिकता, जागरूकता और सकारात्मक चेतना का प्रसार किया वे वास्तव में पूज्य जैन दिवाकर जी की जीवंत प्रेरणा के वाहक हैं।
अखिल भारतीय श्री जैन दिवाकर संगठन समिति को अत्यन्त हर्ष और गौरव का अनुभव है कि पूज्य गुरुदेव के पावन आदर्शों से प्रेरित आपके प्रेरणादायी जीवन, समाजोपयोगी योगदान तथा धर्म और मानवता के प्रति आपकी निष्ठा के सम्मान स्वरूप केसरीमल जी सा. संघवी निम्बाहेड़ा को श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता सहित “जैन दिवाकर रत्न सम्मान” से अलंकृत गया ।
आपका जीवन और कृतित्व न केवल वर्तमान समाज के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि भावी पीढ़ियों को भी पूज्य जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज के आदर्शों अहिंसा, शाकाहार, व्यसनमुक्ति, सदाचार, सेवा और साहित्य साधना के पथ पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।
हम मंगलकामना करते हैं कि आप स्वस्थ, दीर्घायु एवं सतत् सक्रिय रहकर धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा में अपनी प्रेरणादायी भूमिका निभाते रहें तथा पूज्य जैन दिवाकर जी के आदर्शों की पावन ज्योति को निरन्तर प्रकाशित करते रहें।
इसी श्रद्धा और सम्मान की भावना के साथ पूज्य उपाध्याय प्रवर डॉ. श्री गौतम मुनि जी म. सा.,पूज्य प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी म.सा.आदि ठाणा की साक्षी में उदयपुर में आयोजित अखिल भारतीय श्री जैन दिवाकर संगठन समिति युवा शाखा के प्रथम राष्ट्रीय युवा सम्मेलन में यह अभिनंदन-पत्र आपको समर्पित करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करते हैं।