
शीतलनाथ जैन मंदिर सेनवासा/कोडरमा । जैन संत निष्क्रिय व्रत धारी आज के इस भौतिक युग मे सबसे बड़े तपस्वी ओर इस गर्मी में राजस्थान की धरती पर पद विहार करते हुवे जैन संत अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज सेनवासा पहुँचे जहाँ मंदिर जी का दर्शन कर धर्म सभा में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है, जब सब चीजों का मूल्य बढ़ रहा है और आदमी का मूल्य घटता जा रहा है। आज के समय में सबसे सस्ता यदि कुछ है, तो वह है-आदमी और उसकी जान। आज का आदमी स्वार्थ और पैसे में ही बिक रहा है। पैसा सुविधा दे सकता है, परन्तु सुख नहीं। शरीर सुख तो मिला, पर मन की शांति खत्म हो गई।
-मैं मानता हूँ – धन कुछ हो सकता है, कुछ-कुछ हो सकता है, बहुत कुछ हो सकता है, पर धन सब कुछ नहीं हो सकता। हमने यही गलती की – धन को ही सब कुछ मान लिया, और स्वयं से बेखबर हो गए।
कभी परमात्मा से कुछ मांगना पड़े तो, पैसा नहीं – पुण्य मांगना, बुद्धि नहीं – नसीब मांगना, क्योंकि अच्छे-अच्छे बुद्धिमानों को, हमने नसीब वालों के यहाँ पानी भरते देखा है। अकबर नसीब वाला था, और बीरबल बुद्धिमान। आप क्या हो??? मेहनत से कमाइए, पसीने की कमाई खाइये। पाँव उतने ही फैलाइये, जितनी लम्बी चादर हो। ऋण लेकर झूठी शान-शौकत से बचें और शुकून से जीवन जीयें । उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा ने दी ।