
कविता-
अंधियारे पथ पर भटके मन को
मिलता जब न कोई सहारा,
तब दीपक बनकर
राह दिखाते हैं महावीर
सत्य की सरिता बहती निर्मल,
मन-वाणी में एक समान,
झूठ का कोई स्थान न जिसमें,
वहीं बसता है सच्चा भगवान…।।
अहिंसा का कोमल सा स्पर्श
हर प्राणी को देता मान,
विचारों को शुद्ध बनाकर
भर देता करुणा का गान..।
अस्तेय सिखाता है हमको
जो अपना नहीं, उसे न छूना,
लोभ की ज्वाला छोटी होकर
बन जाती दुख का सागर …।।
अपरिग्रह का संदेश निराला
जितना छोड़े, उतना पाएँ,
बंधन जितने कम होते हैं,
उतने ही हम मुक्त हो जाएँ…।
ब्रह्मचर्य की पावन साधना
संयम का अनुपम विस्तार,
इच्छाओं की शांत धरा पर
खिलता आत्मा का सत्कार..।।
पंचव्रत की ये शीतल छाया
जीवन को मधुमय कर जाए,
मन निर्मल, पथ उज्ज्वल होकर
आत्मा को सच्चा सुख दिलाए…।
आओ हम भी कदम बढ़ाएँ,
इन राहों को जीवन में लाएँ,
युद्ध, द्वेष सब दूर भगाकर
शांति का दीप जग में जलाएँ…।।
डॉ.सुनीता जैन
शासकीय कन्या महाविद्यालय में कार्यरत