

सीतामऊ (नयन जैन)। श्री सिद्धाचल धाम जहाज मंदिर तीर्थ की द्वितीय वर्षगाँठ श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर आचार्य भगवंत आनंदचंद्रसागर सूरीश्वर जी महाराज साहब की पावन निश्रा में मंदिर के भव्य शिखर पर विधि-विधानपूर्वक ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजा की भव्य शोभायात्रा से हुई, जो लाभार्थी परिवार अरविंद कुमार अक्षत कुमार पोरवाल के निवास स्थान से प्रारम्भ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जहाज मंदिर पहुँची। मंदिर परिसर में यह शोभायात्रा धर्मसभा में परिवर्तित हुई। उग्र विहार कर ध्वज महोत्सव में अपनी पावनतम निश्रा प्रदान करने के लिए पधारे संत मंडल के प्रवचन हुए।
जहाज मंदिर तीर्थ की द्वितीय वर्षगाँठ पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य भगवंत आनंदचंद्रसागर सूरीश्वर जी महाराज साहब ने अपने प्रवचनों में धर्म और संसार के मूलभूत अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि संसार में कोई भी वस्तु जितनी पुरानी होती जाती है, उसकी कीमत घटती जाती है, जबकि धर्म में प्राचीनता ही उसकी प्रामाणिकता, महत्ता और सुंदरता को और अधिक बढ़ाती है। ध्वजा महोत्सव के प्रसंग को स्पष्ट करते हुए आचार्य भगवंत ने तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए। प्रथम, ध्वज हमें सदैव ऊँचा सोचने और सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की प्रेरणा देता है। व्यक्ति की सोच उच्च होनी चाहिए और उसमें “सबका भला, सबका कल्याण” का भाव निहित होना चाहिए। द्वितीय, ध्वज एकता का प्रतीक है। यह जैन समाज के सभी संप्रदायों को एकजुट होकर रहने तथा संगठन की शक्ति को समझने का संदेश देता है। तृतीय एवं महत्वपूर्ण संदेश में उन्होंने संस्कारों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि जिन शासन के प्रत्येक बालक में उत्तम संस्कारों का विकास होना चाहिए, जिससे वह भगवान महावीर द्वारा बताए गए मार्ग पर चल सके। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री चरित्रचंद्र सागर जी ने गुरु की महिमा एवं सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सद्गुरु वही होते हैं, जिनके हाथों में पवित्रता, वाणी में अमृत और जीवन में व्रत का पालन होता है। मुनिश्री ने अपने प्रेरक प्रवचन में बताया कि गुरु का मार्गदर्शन जीवन को सही दिशा प्रदान करता है तथा उनकी सेवा और आज्ञा का पालन आत्मकल्याण का प्रमुख साधन है। उपस्थित संत मंडल के प्रवचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गुरु भक्ति एवं धर्म मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी।
धर्मसभा के समापन पर ट्रस्ट मंडल द्वारा ध्वजा महोत्सव के लाभार्थी रघुवीरकुमार पोरवाल, किशोर पोरवाल, विजय पोरवाल, अरविंद पोरवाल का परिवार सहित बहुमान किया गया। जहाज मंदिर तीर्थ के ट्रस्टी डॉ अरविंद ओस्तवाल ने संचालन के माध्यम से जहाज मंदिर तीर्थ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस पावन तीर्थ पर तीन हजार प्राचीन श्रीपार्श्वनाथ भगवान एवं श्री आदिनाथ भगवान की मनोहारी के प्रतिमा विराजमान होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर रही है एवं अधिक जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिष्ठा के समय से प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रातः काल स्नात्र पूजन महोत्सव एवं नवकारसी का आयोजन विभिन्न लाभार्थी परिवारों द्वारा निरंतर चल रहा है।
धर्म सभा के पश्चात अभिजीत मुहूर्त में मुख्य जिनालय के विशालतम शिखर सहित समस्त देहरियों के शिखरों पर लाभार्थी परिवार द्वारा विधि-विधानपूर्वक ध्वजारोहण किया गया। ध्वज महोत्सव निमित्त समस्त पूजन का विधि विधान नारायणगढ़ निवासी संगीतकार एवं विधिकारक श्रेयांश दक एवं संभव भंडारी द्वारा पूजा पढ़ाई गई। सकल जैन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष हेमंत जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि समस्त आयोजन में श्रावक श्राविकाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।