रतलाम (श्री जैन दिवाकर स्मारक)। जो स्वंय को जानने में जान नहीं लगाता वो अपनी जान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है । ये मानव का तन जल्दी मिलता नहीं है, इसलिए खोना है अपने आप में, यदि हम अपने आप में नहीं खोए तो ये जीवन खो खो का खेल बन जाएगी, जिन्दगी में एक दुसरे को खो खो दे रहे है ।
निज को जानना सबसे बड़ी जरुरत है और निज को जानने के लिए जिन की सुनना बहुत जरुरी है, जिसने निज को जान लिया वो अपनी बाला टालने के लिए दुसरो को बलि का बकरा नहीं बनाएगा।
समकित यात्री अपनी बला टालने के लिए कभी दुसरो को बलि का बकरा नही बनाता है । अपनी परेशानी दुसरे के गले में नहीं डालता है, जो अपनी परेशानी दुसरो के गले में डालता है नरक उसके गले में पड़ती है। अपनी दशा सुधारने के लिए जो दुसरो की दशा खराब करता है, समय आने पर उसे दास बनना पढता है, और दास हमेशा उदास रहता है ।
अपने भीतर सामर्थ्य होगा साहस होगा तो सबकुछ प्राप्त होगा, दूसरों के भरोसे रहोगे तो बात बनने वाली नहीं है । शांति सब चाहते है लेकिन शांति के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते है, बहु सोचती है की यदि सास बढ़बढ़ करना छोड़ दे तो शांति हो जाये, बेटा सोचता है पिताजी बात बात ने टोकना छोड़ दे तो शांति मिल जाये, सास सोचती है बहु फिजूलखर्ची करना बंद कर दे तो शांति हो जाए ।मतलब हमें यही लगता है की हम तो बिलकुल सही है बस सामने वाला मेरे हिसाब से हो जाए तो शांति मिल जाए । मतलब खुद के शांति के लिए हम स्वंय पर नहीं दूसरों पर निर्भर है ।
हमारे मस्तिष्क में 2 चेनल है पाजिटिव और निगेटिव दोनों का कंट्रोल हमारे पास है, ये हमारे उपर निर्भर करता है की हम कौन चेनल को एक्टिव रखते है, नेगेटिव ज्यादा एक्टिव रहता है या पाजिटिव ज्यादा एक्टिव रहता है 7 घर ने नई बहु ने पहली बार खाना बनाया, सास ने कहा सब्जी अच्छी है लेकिन थोडी सी मिर्ची ज्यादा है, खीर भी अच्छी बनी है लेकिन शक्कर थोड़ी ज्यादा है । अब बहु इस समय दोनों चेनल एक्टिव कर सकती है, नेगेटिव चेनल शुरू करेगी की पहली बार खाना बनाया और सास ने टोका टोकी शुरू कर दी, सही कहते थे लोग की इनकी आदत है रोक टोक करने की, और बहु अगर पाजिटिव चेनल आन करती है तो सोचेगी की सास ने अच्छी बात बताई, ईस घर में मिर्ची कम खाते है, मीठा थोडा कम खाते है, आगे से और अच्छी तरह बनाउंगी । अगर पोजिटिव चेनल एक्टिव हुआ तो सास बहु के रिश्ते मधुर बनेंगे । अपने आप को देखो आप कौन सा चेनल ज्यादा चलाते हो ।
आपका चेनल तो पाजिटिव है लेकिन यदि सामने वाला नेगेटिव चेनल शुरू कर दे तो आप उस स्थिति में क्या करते हो अपना पाजिटिव चेनल बंद करते हो या सामने वाले का नेगेटिव चेनल बंद करवाने का प्रयास करते हो । सामने वाला किसी की बुराई करने के लिए आपके पास आये या किसी के घर की बहन बेटी की गलत बात आपके सामने करे और आप ध्यान से सुनेंगे और आपको आनंद आये तो उसकी नेगेटिविटी आपके भीतर आ जाएगी, किसी की बुराई करने से हम अच्छे नहीं हो जाते है ।