अतिदोहित विकासखण्डों आलोट,जावरा, पिपलौदा, रतलाम सैलाना, बाजना में पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू

रतलाम 10 अप्रैल। ई ई पी एच ई श्री जान्गले ने बताया कि रतलाम जिले के विभिन्न विकासखण्डों में वर्तमान में गिरते भू-जल स्तर से ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित पेयजल स्त्रोत यथा हैण्डपंप, नलकूप आदि जल स्तर की कमी तथा भू-जल स्तर में निरंतर गिरावट परिलक्षित हो रही है। साथ ही जल जीवन मिशन के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल प्रदाय हेतु क्रियान्वित नलजल योजनाऐं भू-जल पर आधारित होने से इनकी क्रियाशीलता पर भी विपरित प्रभाव परिलक्षित हो रहा है।
जिले में ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था पूर्ण रूप से भू-जल पर निर्भर होने से आगामी ग्रीष्म ऋतु में पर्याप्त मात्रा में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने हेतु वर्तमान में उपलब्ध पेयजल स्त्रोतों को निरंतर क्रियाशील रखे जाने हेतु वर्तमान में उपलब्ध भू-जल भण्डारण को सुरक्षित रखा जाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुऐ जिले के अतिदोहित विकासखण्डों आलोट,जावरा, पिपलौदा, रतलाम, सैलाना, बाजना में 15 जुलाई 2026 अथवा पर्याप्त वर्षा होने तक कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती मिशा सिंह ने पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू किया है।
आदेश का उल्लंघन करते पाये जाने अथवा किये जाने पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत उल्लंघन सिद्ध पाये जाने पर कारावास या अर्थदण्ड से दंडित किया जाएगा।

Play sound