रतलाम । रतलाम जिले के जनजातीय कार्य विभाग और शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए अप्रैल का महीना आर्थिक तंगी लेकर आया है। महीने की 8 तारीख बीत जाने के बाद भी सैलाना, बाजना, पिपलोदा और रतलाम विकासखंड के लगभग 3800 से अधिक शिक्षकों के खाते में मार्च माह का वेतन नहीं पहुँचा है।
बैंक की पेनल्टी और सिबिल स्कोर की चिंता
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने इस देरी पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अधिकांश शिक्षकों ने अपनी घरेलू और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए बैंकों से ऋण (Loan) ले रखा है। इन ऋणों की किश्तें (EMI) हर महीने की 1 से 8 तारीख के बीच कटती हैं। वेतन में देरी के कारण न केवल उन पर भारी बैंक पेनल्टी लग रही है, बल्कि उनके डिफाल्टर होने का खतरा भी बढ़ गया है। इससे भविष्य में शिक्षकों को बैंक से लोन मिलने में भारी कठिनाई होगी।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी को दी चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर शीघ्र भुगतान की मांग की है। संघ के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर वेतन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
इन पदाधिकारियों ने उठाई आवाज
वेतन भुगतान की मांग करने वालों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
प्रादेशिक/जिला नेतृत्व: सर्वेश कुमार माथुर (संगठन मंत्री), बद्रीलाल माधढोटिया (जिला संगठन मंत्री), भोपाल उपाध्याय (जिला अध्यक्ष), जितेंद्र सिंह चौहान (जिला सचिव), बाबूलाल छाबड़ा (जिला कोषाध्यक्ष)।
स्थानीय नेतृत्व: रमेश कुमार परमार (रतलाम तहसील अध्यक्ष), सोनिका व्यास, ललित चावला, भरत शर्मा, डी.के. जोशी और लोकेंद्र व्यास।
”शिक्षकों की मेहनत का पैसा समय पर न मिलना विभाग की प्रशासनिक विफलता है। बैंक हम पर जुर्माना लगा रहे हैं, जिसका जिम्मेदार कौन होगा?” > — प्रतिनिधिमंडल, मध्य प्रदेश शिक्षक संघ