
रतलाम। महावीर स्वामी के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने और समाज में करुणा, अहिंसा तथा जीवदया का संदेश प्रसारित करने के उद्देश्य से स्वास्तिक जैन महिला ग्रुप, रतलाम द्वारा एक अनूठी पहल की गई। बकरा ईद के अवसर पर ग्रुप के आह्वान पर 500 से अधिक परिवारों ने अपने-अपने घरों में रहकर विशेष धर्म आराधना, जाप और सामायिक की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मूक पशुओं की आत्मा की शांति और आत्मकल्याण के लिए प्रार्थना करना था।
घर-घर गूँजे मंत्र, बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने निभाई सहभागिता
इस विशेष जीवदया अभियान में केवल महिलाओं ने ही नहीं, बल्कि पुरुषों और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने अपने घरों में सामायिक और जाप कर अहिंसा का संदेश दिया। संस्थापक सारिका जी डूंगरवाल ने इस अभियान की रूपरेखा तैयार कर इसका संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अध्यक्ष कविता जी काठेड की प्रेरणा से यह पूरा अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सचिव मनीषा जी गंगवाल एवं मनीषा जी कोठारी के विशेष सहयोग से भगवान महावीर के संदेशों को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया गया।
सर्वसमाज का मिला समर्थन, अन्य शहरों से भी जुड़ीं महिलाएँ
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह केवल जैन समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विभिन्न समुदायों और सामाजिक संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस अभियान में मुख्य रूप से: अखिल भारतीय राष्ट्रीय महिला परिषद, भक्तांबर ग्रुप,तेजानगर महिला मंडल, शुभ विहार कॉलोनी महिला मंडल स्थानकवासी एवं दिगंबर जैन समाज, पोरवाल समाज, मंदसौर ग्रुप सहित अनेक संस्थाओं के सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े।
रतलाम के बाहर भी पहुँचा संदेश:
स्थानीय स्तर के साथ-साथ मंदसौर, झालरापाटन एवं अन्य शहरों की महिलाओं ने भी इस अभियान से जुड़कर अपने-अपने स्थानों पर घर बैठे धर्म आराधना और जाप में सहभागिता दर्ज कराई। स्वास्तिक ग्रुप की सभी सदस्यों ने इस सामूहिक प्रयास को जीवदया की दिशा में एक अनुकरणीय कदम बताया है।