णमोकार मंत्र की साधना से मिलती है दिव्य शक्ति: मुनि श्री निर्णय सागर जी मसा.

रतलाम।  श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में आयोजित प्रवचन में पूज्य मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म चर्चा से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने अंजन चोर के उदाहरण से बताया कि सच्ची साधना और जिनालय में नियमित आराधना से आकाशगामिनी विद्या प्राप्त की जा सकती है और आत्मा सिद्धालय की ओर अग्रसर होती है।
मुनि श्री ने कहा कि तस्वीर स्मरणीय हो सकती है, लेकिन पूजनीय केवल पंच परमेष्ठी ही होते हैं। जिनवाणी का अध्ययन बुद्धि के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। णमोकार मंत्र की आराधना में पूर्ण समर्पण आवश्यक है, तभी साधक को दिव्य अनुभव प्राप्त होते हैं।
उन्होंने कहा कि साधना में भय का त्याग कर पूर्ण श्रद्धा से समर्पण करना चाहिए। णमोकार मंत्र की महिमा अपरंपार है, इसके स्मरण से जीवन के अंधकार दूर होते हैं। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।