रतलाम । भारत सरकार द्वारा #16DaysofActivism के दौरान बाल विवाह मुक्त अभियान आरंभ किया गया है। अक्षय तृतीया एवं अन्य विवाह मुहूर्तों के दौरान बाल विवाह की संभावनाओं को देखते हुए कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सभी विभागों को समन्वय बनाकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से अभियान संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि शासकीय स्कूलों एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाए तथा हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों से बाल विवाह न करने की शपथ दिलाई जाएगी। स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जागरूकता रैलियां आयोजित की जाऐ तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को गांवों में चर्चा के माध्यम से बाल विवाह रोकने हेतु प्रेरित किया जाए।
प्रशासन द्वारा 18 वर्ष से कम आयु की अविवाहित बालिकाओं की जानकारी संकलित कर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में विशेष सतर्कता हेतु पंच, सरपंच एवं सचिवों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बाल विवाह की सूचना महिला हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एवं बाल विवाह मुक्त पोर्टल http://stopchildmarriage.wcd.gov.in पर दर्ज करावा सकते है। साथ ही सामाजिक एवं धार्मिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के सहयोग से जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
प्रत्येक गांव एवं वार्ड स्तर पर सूचना दल का गठन किया जाएगा, जो विवाह कार्यक्रमों पर नजर रखकर किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को देंगी। जिला स्तर पर कंट्रोल रूम (24*7) भी स्थापित किया जाएगा, जहां प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, जिला एवं परियोजना स्तर पर उडन दस्ते गठित किए जाएंगे, जो अपने क्षेत्र में हो रहे विवाह स्थलों का भ्रमण कर निगरानी रखेंगे। बाल विवाह की सुचना अथवा बाल विवाह होता पाया जाने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने में सहयोग करें तथा किसी भी संदिग्ध विवाह की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।