कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष भी चैत्र नवरात्रि में मेले का आयोजन नहीं हो पाने की सम्भावना

रतलाम । रतलाम के समीप बाजना मार्ग पर 35 किलोमीटर आगे शिवगढ़ से आगे राजपुरा माता स्थान माही नदी के समीप 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन श्री भद्रकाली देवी का प्राचीन मंदिर है जो गढ़ खंखाई के नाम से प्रचलित है प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्रि पर सप्तमी अष्टमी व नवमी तक यहां पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है साथ ही हजारों आसपास के ग्रामीण अंचलों के रहवासी पूर्ण श्रद्धा के साथ इस मेले में उपस्थित होकर माता का दर्शन लाभ लेते है ।
परंतु इस बार कोरोना महामारी के चलते चैत्र नवरात्रि में लगने वाला मेला इस बार शासन के निर्देश के अनुसार आयोजित नहीं होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसा जनचर्चा है कि माता के दरबार में मेले का आयोजन नहीं हो पा रहा है परंतु प्रतिदिन श्रद्धालु जन माता के दर्शन के लिए यहां पर पहुंच रहे हैं।
वर्तमान समय पर यहाँ सेवा देने वाले पुजारी पं. मुकेश श्यामलाल शर्मा ने बतलाया कि कोरोना महामारी के चलते मंदिर प्रांगण में पूर्व की अपेक्षा श्रद्धालुओं का आना-जाना काफी हद तक कम हो गया है विगत वर्ष 2020 में भी यहां पर चैत्र नवरात्रि में आयोजित होने वाला मेला नहीं हो पाया था। माताजी का मंदिर ग्रामीण अंचलों का एकमात्र केंद्र बिंदु और कई ग्रामीण लोगों की कुलदेवी मां गढ़ खंखाई पर होने वाले आयोजन इस कोरोना महामारी का विशेष प्रभाव देखने क़ो मिल रहा है।
पुजारी पं.शर्मा ने बतलाया कि यहाँ आसपास के लगभग कई गाँव क़े श्रद्धालुओं द्वारा यहाँ मन्नत के लिये आना जाना लगा रहता हैं यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की माँ हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं और जब मनोकामना पूर्ण होती हैं तो यहाँ भक्त पशुओं क़ो माता क़े समक्ष लाकर जीवित छोड़ दिया जाता हैं पूर्व में यहाँ बलि प्रथा प्रचलित थी परन्तु ये प्रथा अब बंद कर प्रतीक रूप में अपनाई जाती हैं व जीवों को जीवित छोड़ दिया जाता हैं । वहीं कोरोना महामारी को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जारी गाईड लाईन के अनुसार ही आगामी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।

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