चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन,धर्म–अर्थ–काम–मोक्ष पुरुषार्थ का बताया महत्व


रतलाम 18 अप्रैल । आज स्टेशन रोड स्थित चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य मुनिश्री निर्णय सागर जी मसा. ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति है। इसके लिए समता, संयम और सदाचार का पालन अत्यंत आवश्यक है।
मुनिश्री ने कहा कि संसार में भौतिक सुख क्षणिक हैं, जबकि आत्मिक शांति और आनंद स्थायी होते हैं। व्यक्ति को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे कषायों का त्याग कर सादगी एवं साधना का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सही आहार-विहार, मर्यादित जीवनशैली और नियमित साधना से मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं।
प्रवचन में मुनिश्री ने पुरुषार्थ के महत्व को समझाते हुए कहा कि मनुष्य को निरंतर पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। पुरुषार्थ चार प्रकार के होते हैं—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। धर्म के लिए किया गया कार्य धर्म पुरुषार्थ, आजीविका हेतु किया गया प्रयास अर्थ पुरुषार्थ, संतानोत्पत्ति एवं पालन-पोषण काम पुरुषार्थ तथा साधना, तपस्या और मंत्र-जप द्वारा आत्मा को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करना मोक्ष पुरुषार्थ है। उन्होंने कहा कि जैसा कर्म किया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है। शुभ भाव और शुभ योग से शुभ पुण्यो का उदय होता है, जबकि अशुभ भाव से पाप का जन्म होता है, इसलिए व्यक्ति को सदैव पुण्य बढ़ाने और पाप कर्मों का त्याग करने का प्रयास करना चाहिए।
मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि कौन रखता है अंधेरे के साथियों को, सुबह होते ही उसे बुझा दिया जाता हैं, जबकि किए गए उपकार को सज्जन व्यक्ति ही स्मरण रखते हैं। उन्होंने ‘ब्रेकफास्ट’ का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि उपवास में जो विराम लगता है, वही ब्रेकफास्ट है। रात्रि में भोजन से बचते हुए शरीर को लगभग 12 घंटे का विश्राम देना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य और सक्रियता बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि मार्ग में दिगंबर मुनि के दर्शन शुभ संकेत होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। साथ ही समाज में ज्ञानवृद्धि के लिए बच्चों के साथ-साथ बड़ों की भी पाठशालाएं संचालित होना आवश्यक है, जिससे सभी वर्ग धर्म और आचरण की शिक्षा प्राप्त कर सकें।
मुनिश्री ने अंत में संदेश दिया कि गुरु के प्रति कपट और मित्र के प्रति छल कभी नहीं करना चाहिए तथा शास्त्रों के मार्गदर्शन का सदैव पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन सायंकाल शंका समाधान कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है, जिसमें अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर लाभ लेना चाहिए। इस अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं समाजजन उपस्थित रहे।