गुरु उपासना, अहिंसा और आत्मसंयम को बताया धर्म का मूल आधार


रतलाम। स्टेशन रोड स्थित श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में पूज्य मुनि 108 श्री निर्णय सागर जी मसा. ने कहा कि जीवन में सहनशीलता (सहन) के बिना कोई भी साधना पूर्ण नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि साधु जीवन हो या गृहस्थ जीवन, हर स्थिति में सहनशीलता ही व्यक्ति को ऊंचाई तक पहुंचाती है।
मुनि श्री ने कहा कि आज मनुष्य छोटी-छोटी बातों में असहनशील हो जाता है, जबकि साधना का मार्ग धैर्य, संयम और सहनशीलता से ही प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति कष्ट सहन करना सीख लेता है, वही सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक प्रगति कर सकता है।
गलती सुधारना ही सच्ची साधना
प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि भगवान वह हैं जो त्रुटियों से परे हो जाते हैं, लेकिन सामान्य मनुष्य से गलती होना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति अपनी गलती को पहचाने और उसे सुधारने का प्रयास करे। जो व्यक्ति बार-बार गलती करता है और सुधार नहीं करता, वह साधना के मार्ग से भटक जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दैनिक जीवन में भी हम अनजाने में जीव हिंसा कर बैठते हैं, जैसे पानी का उपयोग करते समय सूक्ष्म जीवों की अवहेलना। इसलिए सजगता और सावधानी आवश्यक है, जिससे अहिंसा का पालन हो सके।
गुरु की उपासना से जीवन में आता है मंगल
मुनि श्री ने कहा कि साधक के जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि होता है। गुरु के चरणों में समर्पण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मंगल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान और साधु अलग नहीं हैं, साधु ही आगे चलकर भगवान बनते हैं। इसलिए गुरु और साधु की सेवा एवं भक्ति अत्यंत आवश्यक है।
प्रायश्चित और सेवा से शुद्ध होता है जीवन
उन्होंने बताया कि यदि जीवन में कोई त्रुटि हो जाए तो उसका प्रायश्चित करना चाहिए। प्रायश्चित से आत्मशुद्धि होती है और व्यक्ति पुनः सही मार्ग पर अग्रसर होता है। दान, सेवा और संयम के माध्यम से भी व्यक्ति अपने जीवन को पवित्र बना सकता है।
गृहस्थ जीवन में भी संभव है साधना
मुनि श्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन में रहकर भी व्यक्ति धर्म का पालन कर सकता है। नियमित नियमों का पालन, साधु-संतों की सेवा, समय पर आहार दान और संयमित जीवन शैली अपनाकर गृहस्थ भी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।
प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे और धर्म लाभ प्राप्त किया।