“अहंकार छोड़ें, पुरुषार्थ अपनाएँ-यही सच्चा धर्म”- मुनि श्री 108 निर्णय सागर जी महाराज

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रतलाम। चंद्र प्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री 108 निर्णय सागर जी महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में धर्म, विनम्रता और पुरुषार्थ के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्चा साधु वही है, जो अहंकार और चमत्कार से दूर रहकर आत्मकल्याण के मार्ग पर चलता है।
मुनि श्री ने बताया कि आज के समय में लोग चमत्कारों के पीछे भागते हैं, जबकि वास्तविक धर्म आत्मा की शुद्धि और सम्यक दर्शन में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अहंकार और गर्व से किया गया आचरण व्यक्ति को धर्म से दूर कर देता है। “दूसरों का अपमान करना या स्वयं को श्रेष्ठ मानना, आत्मा के धर्म का तिरस्कार है,” उन्होंने कहा।
अपने प्रवचन में मुनि श्री ने एक प्रेरक प्रसंग के माध्यम से समझाया कि परिवार और समाज में हर व्यक्ति की अपनी-अपनी क्षमता और भूमिका होती है। किसी को छोटा या कमजोर समझना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि परिवार में एकता और सहयोग ही सुख-शांति का आधार है।
उन्होंने भाग्य और पुरुषार्थ के संबंध पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। “आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य बनता है, इसलिए व्यक्ति को निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए,” उन्होंने कहा। मुनि श्री ने यह भी प्रेरणा दी कि कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए और निरंतर प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसके साथ ही दोपहर में संत निवास पर आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में वक्ता मध्य प्रदेश वित्तीय आयोग सचिव राहुल जैन ने स्कूली छात्रों को संबोधित करते हुए जीवन में संतुलन बनाए रखने की सीख दी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि केवल उपलब्धियों के पीछे भागने से परिवार, स्वास्थ्य और धर्म से दूरी बढ़ जाती है, इसलिए जीवन में संतुलन आवश्यक है। तथा नई पीढ़ी चेट जीपीटी और एआई के पीछे दौड़ रही है उससे उनके दिमागी क्षमता काम हो रही है इसलिए इनका कम से कम उपयोग करें।

शंका समाधान सत्र:
शाम 6:30 बजे आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने अपने प्रश्न रखे, जिनका मुनि श्री ने सरल और प्रभावी ढंग से समाधान किया।

समापन:
कार्यक्रम का समापन मंगलभावना के साथ हुआ, जिसमें सभी को धर्म, संयम और पुरुषार्थ के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।

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