जीव दया : सेवा का सर्वोच्च धर्म

श्री श्वेतांबर जैन वरिष्ठ सेवा समिति की पहल, अध्यक्ष अभय सुराणा ने की अपील

जावरा । श्री श्वेतांबर जैन वरिष्ठ सेवा समिति, जावरा द्वारा जीव दया के क्षेत्र में निरंतर सेवाकार्य किए जा रहे हैं। समिति के अध्यक्ष अभय सुराणा ने बताया कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार “अहिंसा परमो धर्मः” एवं “जियो और जीने दो” का सिद्धांत है। मनुष्य होने के नाते मूक प्राणियों की सेवा करना हमारा नैतिक और सामाजिक दायित्व है। आज का प्रसग 24 वे तीर्थंकर त्रिभुवन नायक शासनपति श्री महावीर स्वामी भगवान का केवल ज्ञान कल्याण का दिन है और उनके सिद्धांतों को हमने सार्थक किया है जियो और जीने दो।
श्री सुराणा ने कहा कि समिति द्वारा नगर एवं आसपास की गौशालाओं में गौ माता को हरा चारा, गुड़ व गो-ग्रास सब्जियां पशु आहार खिलाने का कार्य किया जाता रहा है। साथ ही पक्षियों के लिए सकोरे व बेसहारा पशुओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पानी के बर्तन रखने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है। शीत ऋतु में समिति द्वारा गौवंश को ठंड से बचाने के लिए कंबल वितरण व गौशालाओं में म्यूजिक सिस्टम भी लगवाए गए थे।
आपने कहाकी “किसी असहाय जीव की सेवा से जो आत्मिक संतोष मिलता है, वह करोड़ों के दान से भी बड़ा है। तुलसीदास जी ने कहा है – दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।” संस्था के वरिष्ठ सदस्य अनिल पावेचा व देवेंद्र धारीवाल का प्रकाश संघवी एवं शेखर नहार ने मोतियों की माला पहनाकर उन्हें शुभकामना देकर उनका जन्मदिन मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन संस्था के उपाध्यक्ष पुखराज पटवा ने किया तथा आभार अनिल धारीवाल ने माना।
इस अवसर पर इनकी रही गरिमामय उपस्थिति
प्रकाशचंद संघवी सरदारमल धारीवाल राजेंद्र कोचर सुरेंद्र संघवी शेखर नाहर अनिल पावेचा पुखराज पटवा देवेंद्र धारीवाल अभय सुराणा ऋषभ छाजेड़ अशोक झामर शांतिलाल डांगी आदि उपस्थित थे।

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